सूखे के बीच अमरावती के निजी स्कूलों की फीस वसूली से किसान परेशान
अंजनगांव सुर्जी और दर्यापुर तालुका के कुछ निजी स्कूलों पर फीस के लिए बार-बार पालकों के पीछे पड़ने की शिकायतें हैं। पालक राहत चाहते हैं।
बारिश में आए खंड की वजह से खरीफ सीजन की फसलों की पैदावार को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। सूखे के साए में अब बच्चों की पढ़ाई की फीस का खर्च भी किसान परिवारों के लिए सिरदर्द बन रहा है।
अंजनगांव सुर्जी और दर्यापुर तालुका के कुछ निजी स्कूलों के खिलाफ शिकायतें सामने आई हैं। शिकायत यह है कि ये स्कूल विद्यार्थियों के पालकों के पीछे लगातार फीस के लिए लगे हुए हैं। जो किसान पालक पहले से ही आर्थिक तंगी में हैं, उनके लिए यह दोहरी मुसीबत बन गई है।
इस खरीफ सीजन में बारिश के खंड का असर फसलों की बढ़त पर पड़ने की आशंका है। दूसरी तरफ खेती की बढ़ती लागत, कर्ज की किस्तें, घर का खर्च और बच्चों की पढ़ाई का खर्च, इन सबके चलते किसान परिवारों के सामने पैसों का हिसाब बैठाना बड़ी चुनौती हो गया है। पालकों का कहना है कि जिनकी कमाई खेती पर टिकी है, उनके लिए फीस की रकम वक्त पर भरना मुश्किल हो रहा है।
पालकों ने बताया कि तालुका के कुछ निजी स्कूलों में विद्यार्थियों से बकाया या चालू फीस भरने को कहा जा रहा है। कुछ पालकों ने यह शिकायत भी की है कि उन्हें फोन करके फीस के बारे में पूछा जा रहा है। स्कूलों का पैसों का इंतजाम और फीस की वसूली अलग मुद्दा है, फिर भी गांव-देहात की मौजूदा आर्थिक हालत को देखते हुए परेशान पालकों को कुछ हद तक राहत देने की मांग उठ रही है।
पालक चाहते हैं कि स्कूल मैनेजमेंट इस पर सोचे कि तंगी में फंसे पालकों को फीस भरने के लिए और वक्त दिया जा सकता है या फीस किस्तों में भरने की सहूलियत मिल सकती है। पालकों का यह भी कहना है कि फीस बकाया होने के कारण बच्चों पर किसी भी तरह का मानसिक दबाव नहीं पड़ना चाहिए। उनके मुताबिक अगर स्कूल मैनेजमेंट किसान परिवारों की हालत और खरीफ सीजन की अनिश्चितता को समझकर संवेदनशील रुख अपनाए, तो बच्चों की पढ़ाई पर आर्थिक संकट का असर नहीं पड़ेगा।
कुछ पालकों की शिकायतें आने के बाद इन मामलों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। सभी निजी स्कूलों पर एक साथ आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए। जिन स्कूलों को लेकर शिकायतें हैं, वहां पालकों की बात, स्कूल मैनेजमेंट का पक्ष और लागू सरकारी नियमों की जांच होनी चाहिए। इस मामले में जिलाधिकारी और शिक्षणाधिकारी के ध्यान देने की मांग की गई है।