रविवार, 1 नवंबर 2026

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BRICS समिट: AI में सहयोग बढ़ाने चीन का ओपन सोर्स जोन का प्रस्ताव, अमेरिका को टक्कर की चर्चा

BRICS समिट: AI में सहयोग बढ़ाने चीन का ओपन सोर्स जोन का प्रस्ताव, अमेरिका को टक्कर की चर्चा तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

नई दिल्ली में हुए BRICS समिट 2026 में चीन ने AI ओपन सोर्स जोन बनाने की बात कही, मकसद है टेक्नॉलॉजी में सहयोग और अमेरिका पर निर्भरता कम करना।

नई दिल्ली में चल रहे BRICS समिट 2026 में चीन ने AI के मामले में एक बड़ा कदम उठाने का ऐलान किया है। चीन अब BRICS देशों के लिए एक AI Open Source Zone खड़ा करने की दिशा में काम करने वाला है। इसके पीछे मकसद यह है कि AI टेक्नॉलॉजी में आपसी सहयोग बढ़े, ओपन सोर्स मॉडल्स को बढ़ावा मिले, और डिजिटल इंडस्ट्री व रिसर्च को रफ्तार मिले। अगर यह पहल आगे बढ़ती है तो BRICS देशों को पश्चिमी देशों की टेक्नॉलॉजी पर जो निर्भरता है, उसे कम करने का मौका मिल सकता है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि BRICS देशों को AI के क्षेत्र में और ज्यादा साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। इसी सिलसिले में चीन की अगुवाई में AI के लिए एक ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म या यूं कहें 'Open Source Zone' बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।

इस प्लेटफॉर्म के जरिए BRICS देशों के रिसर्चर, कंपनियां और टेक्नॉलॉजी सेक्टर की संस्थाएं मिलकर AI डेवलपमेंट पर काम कर सकेंगी। चीन का फोकस AI मॉडल्स, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और टेक्नॉलॉजी की जानकारी को आपस में शेयर करने पर बढ़ाने का है।

चीन का यह प्रस्ताव सिर्फ AI तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका जुड़ाव डिजिटल इंडस्ट्री, व्यापार, मैन्युफैक्चरिंग और साइंस-टेक्नॉलॉजी में सहयोग से भी है। शी जिनपिंग ने यह भी कहा कि BRICS देशों के बीच सप्लाई चेन को स्थिर और सुचारू बनाए रखने पर जोर देना जरूरी है।

BRICS का दायरा बढ़ने के बाद इस ग्रुप में बड़ी आबादी और बड़ा बाजार तैयार हो गया है। ऐसे में अगर AI, डिजिटल सर्विसेज और टेक्नॉलॉजी सेक्टर में आपसी सहयोग बढ़ता है तो सदस्य देशों को बड़े पैमाने पर आर्थिक मौके मिल सकते हैं।

चीन के इस AI प्रस्ताव को सिर्फ टेक्नॉलॉजी सहयोग के तौर पर नहीं देखा जा रहा। अमेरिका और चीन के बीच AI और सेमीकंडक्टर टेक्नॉलॉजी को लेकर जो होड़ चल रही है, उसे देखते हुए BRICS की यह पहल अहम मानी जा रही है। हालांकि यह प्रोजेक्ट सीधे अमेरिका को चुनौती देने के लिए है, ऐसा आधिकारिक तौर पर नहीं कहा गया है। BRICS में AI का इस्तेमाल डेवलपमेंट, डिजिटल इकॉनॉमी और टेक्नॉलॉजी सहयोग बढ़ाने के लिए करने पर जोर दिया जा रहा है।

भारत ने भी BRICS के जरिए AI, टेक्नॉलॉजी और Global south के हित में सहयोग बढ़ाने की बात रखी है। अब आगे यह देखना अहम रहेगा कि चीन का यह प्रस्ताव असल में कितनी तेजी से शक्ल लेता है और भारत समेत बाकी सदस्य देश इसमें कितनी सक्रियता से हिस्सा लेते हैं।

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