काले समुद्र में जंग का असर: यूक्रेन के रिसर्चरों का अंदाज़ा, 1 लाख 20 हजार से ज्यादा डॉल्फिन मरे
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
यूक्रेन के रिसर्चरों के अंदाज़े के मुताबिक रूस-यूक्रेन युद्ध में काले समुद्र के 1 लाख 20 हजार से ज्यादा डॉल्फिन और दूसरे समुद्री स्तनधारी मारे गए हैं।
रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग का असर सिर्फ इंसानों पर नहीं पड़ रहा। लोगों की जान और बुनियादी सुविधाएं तो तबाह होती ही हैं, साथ में कुदरत का भी बड़ा नुकसान हो रहा है। इंसानों की इस लड़ाई की मार अब काले समुद्र की समुद्री जिंदगी पर पड़ रही है।
यूक्रेन के रिसर्चरों ने अंदाज़ा लगाया है कि युद्ध की वजह से अब तक 1 लाख 20 हजार से ज्यादा डॉल्फिन और दूसरे समुद्री स्तनधारी जानवर मर चुके हैं। इससे काले समुद्र के कुदरती इकोसिस्टम पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। बताया गया है कि इसकी कीमत बहुत भारी है और आने वाले वक्त में इंसान को इसे चुकाना पड़ेगा।
रूसी सेना जो ताकतवर सोनार सिस्टम इस्तेमाल करती है, मिसाइलों के लॉन्च और समुद्र के नीचे होने वाले धमाके डॉल्फिन के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। डॉल्फिन रास्ता पहचानने और खाना ढूंढने के लिए गूंज पर टिके सिस्टम का इस्तेमाल करती हैं। जंग के तेज शोर से उनकी यह कुदरती ताकत बिगड़ रही है। उन्हें दिशा पहचानने, एक-दूसरे से संपर्क करने और खाना ढूंढने में दिक्कत हो रही है।
कुछ डॉल्फिन किनारे पर मरी हुई मिल रही हैं, जबकि कई की लाशें समुद्र की तह में चली जाती हैं। इसी वजह से असल में कितनी मौतें हुईं, यह गिनना भी मुश्किल है।
युद्ध के दौरान कई युद्धपोत, तेल ढोने वाले टैंकर और माल ढोने वाले जहाज़ क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके चलते समुद्र में तेल, ईंधन और दूसरे केमिकल बड़ी मात्रा में रिसे हैं और यह रिसाव अब भी जारी है। इस प्रदूषण का असर समुद्र की मछलियों, सीपियों और दूसरे कई जलचरों पर पड़ रहा है। रिसर्चरों ने यह भी बताया है कि किनारे के पक्षियों पर भी जंग के ड्रोन और धमाकों के शोर की मार पड़ रही है। खाद्य श्रृंखला बिगड़ने से पूरे समुद्री इकोसिस्टम को खतरा है।
यूक्रेन के तुझली लगून्स नेशनल पार्क के रिसर्च प्रमुख इवान रुसेव के अंदाज़े के मुताबिक 2022 में युद्ध शुरू होने के बाद डॉल्फिन की मौतें काफी बढ़ गईं। 2026 तक मौतों का अंदाज़ा 1 लाख 20 हजार के पार पहुंच गया है। रिसर्चरों का कहना है कि काले समुद्र में समुद्री स्तनधारियों की कुल तादाद को देखते हुए यह बहुत बड़ा झटका है।
युद्ध खत्म होने के बाद भी इस समुद्री जिंदगी को पहले जैसी हालत में लौटने में 30 से 50 साल लग सकते हैं। इसलिए डर जताया जा रहा है कि रूस-यूक्रेन युद्ध का असर पर्यावरण पर कई दशकों तक बना रहेगा। इस जंग की वजह से कुदरती दौलत भी दांव पर लग गई है।
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