चंद्रपुर में बाघ के हमलों में एक ही दिन दो किसानों की जान गई
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
चिमूर और सिंदेवाही तालुका में 30 अक्टूबर को बाघ के हमले में दो किसानों की मौत हो गई। सिंदेवाही में एक हफ्ते में यह तीसरी मौत है।
चंद्रपुर जिले के चिमूर और सिंदेवाही तालुका में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को बाघ के हमलों में दो किसानों की जान चली गई। एक ही दिन में दो अलग-अलग तालुकाओं में हुई इन घटनाओं से किसानों और गांव वालों में गुस्सा और डर फैला हुआ है। चंद्रपुर जिले में अब तक मानव-वन्यजीव संघर्ष में कुल 38 लोगों की मौत हो चुकी है।
पहली घटना चिमूर तालुका के उरकुडपार में हुई। यहां 55 साल के किसान सदाशिव चिरकुटा खडसंग अपनी पत्नी के साथ खेत गए थे। दोपहर करीब साढ़े बारह बजे खेत के पास के जंगल में छिपे बाघ ने अचानक उन पर झपट्टा मारा। पति पर हमला होते देख पत्नी चीख पड़ी और उनकी आवाज सुनकर आसपास के किसान और खेत मजदूर मौके की तरफ दौड़े। तब तक बाघ सदाशिव को घसीटकर घने जंगल की ओर ले जा चुका था और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
खबर मिलते ही सहायक वनसंरक्षक महेश गायकवाड, वनपरिक्षेत्र अधिकारी किशोर देऊळकर, क्षेत्र सहायक नैताम, राठोड, वनरक्षक अमोल नेवारे और भिसी, शंकरपूर व मुरपार के वन कर्मचारी मौके पर पहुंचे और पंचनामा किया। चिमूर के पुलिस निरीक्षक दिनेश लबडे और सहायक पुलिस निरीक्षक शीतल खोब्रागडे ने भी जाकर हालात देखे। शव को पोस्टमार्टम के लिए चिमूर उपजिला अस्पताल भेजा गया है। वन विभाग ने मृतक के परिवार को 50 हजार रुपये की नकद मदद तुरंत दे दी है।
दूसरी घटना सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के नवरगांव उपवन क्षेत्र में आने वाले धुमणखेडा में शुक्रवार शाम के आसपास सामने आई। 75 साल के पत्रु रामाजी मेश्राम, निवासी धुमणखेडा, दोपहर करीब दो बजे गांव से सटे अपने खेत में धान की फसल देखने गए थे। शाम तक घर नहीं लौटे तो परिवार वालों ने तलाश की। खेत में उनका चश्मा, लाठी, चप्पल और खून के निशान मिले।
गांव वालों की मदद से वन विभाग ने तलाशी अभियान चलाया। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के पास पत्रु मेश्राम का क्षत-विक्षत शव मिला। बाघ उन्हें खेत से घसीटकर ले गया और मार डाला।
सिंदेवाही तालुका में एक हफ्ते के भीतर बाघ के हमले में जान जाने की यह तीसरी घटना है। इससे पहले 24 अक्टूबर को पळसगांव (जाट) के नानाजी कामडी और 25 अक्टूबर को भेंडाळा के खेतों में आंगनवाड़ी सेविका प्रेमीला महाडोरे को बाघ ने मार डाला था। लगातार हो रही इन घटनाओं से पूरे तालुका में दहशत है।
अभी खेतों में धान की कटाई और खेती के काम आखिरी दौर में हैं और ऐसे वक्त बाघों के हमले बढ़ने से किसान और मजदूर जान हथेली पर रखकर काम कर रहे हैं। नाराज गांव वालों ने आदमखोर बाघों का बंदोबस्त करने, उन्हें पकड़ने के लिए फौरन पिंजरे लगाने और वन विभाग से गश्त बढ़ाकर असरदार इंतजाम करने की जोरदार मांग की है। इस बीच वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे जंगल से सटे खेतों में अकेले न जाएं।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।