चंद्रपुर में पलसगांव का बाघ टी-179 पिंजरे में कैद, पोंभुर्णा में बाघ के हमले में चरवाहा घायल
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
वन विभाग ने 30 अक्टूबर को पलसगांव में महिला की जान लेने वाले टी-179 बाघ को पकड़ा। उसी दिन पोंभुर्णा के सातारा तुकूम में बाघ ने 60 साल के चरवाहे को गंभीर रूप से घायल किया।
चंद्रपुर जिले में वन विभाग को पलसगांव के बाघ को पकड़ने में कामयाबी मिल गई है। 30 अक्टूबर, शुक्रवार को दोपहर करीब साढ़े तीन बजे टी-179 (एसएम-1) नंबर का बाघ पिंजरे में फंस गया। इसी बाघ ने 16 अक्टूबर को पलसगांव में एक महिला पर हमला किया था, जिसमें उनकी मौत हो गई थी। यह बात वन विभाग ने बताई।
चिमूर तहसील के पलसगांव वन परिक्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से इस बाघ की दहशत थी। 16 अक्टूबर को उसने पलसगांव की उषा अंकुश गुरनुले पर हमला कर उन्हें मौके पर ही मार डाला था। इस घटना से गुस्साए लोगों ने पूरे तीन घंटे रास्ता रोको आंदोलन किया था।
लोगों की सुरक्षा का सवाल गंभीर हो गया तो वन विभाग ने ऊपर के स्तर पर तुरंत पैरवी की और प्रधान मुख्य वनसंरक्षक (वन्यजीव) से बाघ को पकड़ने की कानूनी इजाजत हासिल की। इसी इजाजत के तहत शुक्रवार दोपहर करीब 3.30 बजे पलसगांव बीट के गोंडमोहाली कक्ष क्रमांक 558 में कार्रवाई की गई।
यह कार्रवाई क्षेत्र संचालक प्रभुनाथ शुक्ल, उपसंचालक विशाल माली और सहायक वनसंरक्षक साईतन्मय डुबे के मार्गदर्शन में हुई। पलसगांव के वन परिक्षेत्र अधिकारी सागर बारसागडे, क्षेत्र सहायक सी. एन. रासेकर, वनरक्षक डी. बी. खार्डे, विक्रांत एन. दुधे और चंद्रपुर ट्रांजिट ट्रीटमेंट सेंटर (टीटीसी) की विशेषज्ञ टीम ने बाघ को सुरक्षित तरीके से पिंजरे में बंद किया। आगे की मेडिकल जांच और इलाज के लिए उसे फौरन चंद्रपुर के टीटीसी सेंटर ले जाया गया है।
पलसगांव में बाघ पकड़े जाने से गांव वालों ने बड़ी राहत की सांस ली। लेकिन उसी दिन पोंभुर्णा तहसील में इंसान और वन्यजीव के टकराव की एक और भयानक घटना हो गई।
पोंभुर्णा तहसील के सातारा तुकूम के राजेश्वर बिजा सिडाम (उम्र 60) रोज की तरह अपनी गायें चराने जंगल की तरफ गए थे। सातारा तुकूम के वन कक्ष क्रमांक 436 में घात लगाकर बैठे बाघ ने अचानक झपट्टा मारकर उन्हें गंभीर रूप से घायल कर दिया। उनके शरीर पर गहरे जख्म हैं। खबर मिलते ही वन विभाग के कर्मचारी और गांव के लोग मौके पर पहुंचे और घायल राजेश्वर सिडाम को चंद्रपुर के जिला सामान्य अस्पताल में भर्ती कराया। वहां उनका इलाज चल रहा है।
एक ही दिन में एक जगह दहशत फैलाने वाला बाघ पकड़ा गया, तो दूसरी जगह जंगल से सटे इलाके में चरवाहे पर हमला हो गया। इससे किसानों, खेत मजदूरों और चरवाहों में फिर डर फैल गया है। जान जोखिम में डालकर जंगल और खेतों में जाना पड़ता है, इसलिए लोग जोरदार मांग कर रहे हैं कि वन विभाग ऐसे इलाकों में गश्त बढ़ाए और ठोस उपाय करे।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।