ब्रिक्स समिट में मोदी-शी जिनपिंग की बैठक, सीमा विवाद और व्यापार पर बनी सहमति
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की करीब 50 मिनट चली मुलाकात में सीमा, व्यापार और आपसी सहयोग पर बात हुई।
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नई दिल्ली में हो रहे ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम द्विपक्षीय बैठक हुई। पिछले कुछ समय से भारत और चीन के रिश्तों में लगातार सुधार देखा जा रहा है, और इसी माहौल में यह मुलाकात हुई। खास बात यह रही कि करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद जिनपिंग भारत आए, जिसे दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों के लिहाज से बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। दोनों नेताओं के बीच करीब 50 मिनट तक चली इस बातचीत में सीमा विवाद, व्यापार, लोगों के आपसी संपर्क और दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
बैठक में पीएम मोदी ने साफ कहा कि भारत और चीन के रिश्ते आगे बढ़ें, इसके लिए सीमा पर शांति और स्थिरता बने रहना सबसे जरूरी शर्त है। दोनों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि पहले से हुए सीमा समझौतों और आपसी सहमति का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए। दोनों नेताओं ने यह भी दोहराया कि लंबे समय से लटके सीमा विवाद का हल दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालीन हित को ध्यान में रखते हुए निकाला जाए, जो न्यायसंगत हो, वाजिब हो और दोनों पक्षों को मंजूर हो।
अगस्त 2025 में तियानजिन में हुई बैठक के बाद भारत-चीन रिश्तों में जो सुधार आया, उसका जिक्र करते हुए दोनों नेताओं ने संतोष जताया। दोनों इस बात पर सहमत हुए कि आपसी रिश्तों को छोटी-मोटी बातों के बजाय लंबे समय की सोच और रणनीति के नजरिए से देखा जाना चाहिए, और यह ध्यान रखा जाए कि कोई भी मतभेद सीधे विवाद में न बदल जाए।
भारत का पक्ष रखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि दोनों बड़ी ताकतों के बीच रिश्ते आगे बढ़ाने के लिए तीन सुनहरे सिद्धांतों का पालन जरूरी है - आपसी सम्मान, आपसी संवेदनशीलता और आपसी हित। इसके अलावा दोनों नेताओं ने दोनों देशों के लोगों के बीच बढ़ते संपर्क पर भी संतोष जताया। सांस्कृतिक आदान-प्रदान, पर्यटन, शिक्षा और कारोबारी सहयोग को और आसान बनाकर दोनों देशों की जनता के बीच की दूरी कम करने की जरूरत पर बल दिया गया।
द्विपक्षीय आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने की दिशा में व्यापार असंतुलन और सप्लाई चेन से जुड़ी चिंताओं पर भी विस्तार से बात हुई। दोनों देशों ने एक-दूसरे की आर्थिक चिंताओं को दूर करते हुए आसान, भरोसेमंद और पारदर्शी बाजार मुहैया कराने पर सहमति जताई।
वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपसी सहमति बढ़ाने पर भी दोनों नेता एकमत हुए। पीएम मोदी ने भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान चीन के सहयोग के लिए आभार जताया और 2026 के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को सफल बनाने में चीन की सकारात्मक भूमिका की तारीफ की।
लंबे समय से चले आ रहे सीमा तनाव के बाद भारत और चीन के बीच शुरू हुई इस बातचीत की प्रक्रिया को एशिया और दुनिया भर में नए राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों की शुरुआत माना जा रहा है।
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