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23:24 IST

7 साल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे, दिल्ली में मोदी से मिलेंगे

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाली 18वीं ब्रिक्स समिट में शामिल होने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे हैं, गलवान झड़प के बाद उनका यह पहला भारत दौरा है।

7 साल बाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ रहे, दिल्ली में मोदी से मिलेंगे
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

भारत और चीन के रिश्तों के लिहाज से एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाली 18वीं ब्रिक्स समिट में शामिल होने भारत आ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि कर दी है, और इसे वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।

2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हुई हिंसक सैन्य झड़प के बाद शी जिनपिंग का यह पहला भारत दौरा होगा। इससे पहले शी जिनपिंग अक्टूबर 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुई दूसरी भारत-चीन अनौपचारिक शिखर बैठक के लिए भारत आए थे। यानी करीब सात साल के लंबे अंतराल के बाद चीनी राष्ट्रपति भारत की धरती पर कदम रखने वाले हैं।

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खास न्योते पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समिट में शामिल होंगे। यह समिट नई दिल्ली के प्रगति मैदान स्थित भारत मंडपम में होगी। दोनों देशों के राजनयिक अधिकारियों ने अभी तक पूरा एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अलग द्विपक्षीय बैठक होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

पिछले साल चीन के तियानजिन में हुई शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी चीन गए थे। उसी दौरान हुई मुलाकात में मोदी ने शी जिनपिंग को 2026 की ब्रिक्स समिट के लिए भारत आने का न्योता दिया था। सीमा विवाद पर तनाव कुछ हद तक कम होने के बाद अब दोनों देशों के मुखिया आमने-सामने आने वाले हैं, इसलिए इस बैठक पर पूरी दुनिया की नजर है।

गलवान की घटना के बाद भारत और चीन के बीच राजनीतिक और व्यापारिक रिश्ते काफी तनावपूर्ण हो गए थे। सीमा पर दोनों देशों ने भारी सैन्य तैनाती की थी। लेकिन पिछले कई महीनों में सैन्य और राजनयिक स्तर पर हुई कई दौर की बातचीत के बाद सीमा पर हालात सामान्य करने की कोशिशें शुरू हो गई हैं। इस पूरे हालात में चीनी राष्ट्रपति का यह दौरा दोनों देशों के बीच बर्फ पिघलने और रिश्ते सुधरने की तरफ बढ़ते कदम के साफ संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। जानकारों का कहना है कि इस मुलाकात में सीमा पर शांति, आपसी व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत हो सकती है।

भारत की अध्यक्षता में हो रही इस ब्रिक्स समिट को खासा अहम माना जा रहा है। इस समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ-साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और बाकी सदस्य देशों के प्रमुख भी खुद मौजूद रहेंगे। दुनिया की अर्थव्यवस्था और राजनीति में ब्रिक्स संगठन की जगह दिन-ब-दिन और मजबूत होती जा रही है। फिलहाल ब्रिक्स देश दुनिया की करीब 49 फीसदी आबादी (लगभग 3.9 अरब लोग) की नुमाइंदगी करते हैं। साथ ही दुनिया के कुल जीडीपी में इस समूह की हिस्सेदारी करीब 40 फीसदी है और वैश्विक व्यापार में ब्रिक्स देशों का हिस्सा 26 फीसदी से ज्यादा है। नई दिल्ली में हो रही इस ऐतिहासिक समिट से दुनिया के मंच पर ब्रिक्स का राजनीतिक और आर्थिक असर और बढ़ेगा, इसमें कोई शक नहीं है।

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