मिडल ईस्ट में शांति के लिए चीन आगे, BRICS देशों को साथ लेने की तैयारी
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मिडल ईस्ट के संघर्ष में मध्यस्थी की तैयारी जताई, BRICS देशों को साथ लेकर शांति और स्थिरता लाने की बात कही।
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मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच चीन ने वहां शांति लाने के लिए आगे आने की तैयारी दिखाई है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा है कि वे संघर्ष में शामिल गुटों के बीच मध्यस्थी करने को तैयार हैं। साथ ही उन्होंने यह भी साफ किया कि मिडल ईस्ट में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए चीन BRICS के सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करना चाहता है। इससे अमेरिका और बाकी पश्चिमी देशों के प्रभाव के साथ-साथ मिडल ईस्ट की डिप्लोमेटिक तस्वीर में चीन की भूमिका और अहम होने की संभावना बन रही है।
मिडल ईस्ट में जंग और तनाव का वहां की राजनीतिक और आर्थिक हालत पर बड़ा असर पड़ रहा है। ऐसे हालात में चीन सिर्फ स्थिति पर नजर रखने के बजाय बातचीत और मध्यस्थी के जरिए रास्ता निकालने की तैयारी में है। शी जिनपिंग के बयान से यह संकेत मिला है कि चीन संघर्ष के अलग-अलग पक्षों से बात करने के लिए अपने डिप्लोमेटिक कनेक्शन इस्तेमाल करने को तैयार है। चीन पहले भी मिडल ईस्ट के देशों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर चुका है, इसलिए बीजिंग के इस नए प्रस्ताव को उसकी उसी डिप्लोमेटिक भूमिका का विस्तार माना जा रहा है।
चीन इस कोशिश में BRICS के सदस्य देशों को भी शामिल करना चाहता है। BRICS में चीन के अलावा भारत, रूस, ब्राजील, साउथ अफ्रीका और बाकी सदस्य देश शामिल हैं। इस ग्रुप की आर्थिक ताकत और इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में बढ़ते असर को देखते हुए, मिडल ईस्ट की शांति प्रक्रिया में BRICS को एक मंच के तौर पर आगे लाने की चीन की कोशिश काफी अहम मानी जा रही है। मिडल ईस्ट के संघर्ष का असर तेल की कीमतों, ट्रेड रूट, समुद्री आवाजाही और दुनिया की इकोनॉमी पर भी पड़ रहा है, इसलिए इस संघर्ष का हल निकालना सिर्फ संबंधित देशों के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए जरूरी हो गया है।
मिडल ईस्ट की राजनीति में अमेरिका का लंबे समय से बड़ा दबदबा रहा है, लेकिन चीन पिछले कुछ सालों से इस इलाके में अपनी डिप्लोमेटिक और आर्थिक मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसी वजह से बीजिंग की मध्यस्थी की यह तैयारी चीन के बढ़ते ग्लोबल प्रभाव के हिस्से के तौर पर भी देखी जा रही है। हालांकि मध्यस्थी कामयाब होने के लिए संघर्ष में शामिल सभी गुटों का भरोसा जीतना जरूरी होगा। सीजफायर, सिक्योरिटी, इलाके की सॉवरेनिटी और आगे के राजनीतिक हल जैसे मुद्दों पर सहमति बनाना चीन के सामने बड़ी चुनौती होगी। फिर भी BRICS के जरिए मिलकर कोशिश करने की चीन की तैयारी से मिडल ईस्ट की शांति बातचीत को एक नया डिप्लोमेटिक मंच मिलने की उम्मीद बनी है।