गड़चिरोली के मुलचेरा में चरवाहे ने लाठी से बाघ को भगाया, बाल-बाल बचा
गड़चिरोली जिले के मुलचेरा तहसील में मवेशी चरा रहे एक चरवाहे पर बाघ ने हमला किया, लेकिन उसने लाठी के दम पर बाघ को भगा दिया।
गड़चिरोली जिले के मुलचेरा तहसील स्थित ठाकुरनगर जंगल में गुरुवार दोपहर एक चरवाहे पर बाघ के हमले से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। मवेशी चरा रहे गणेश खितीस दास पर अचानक बाघ टूट पड़ा, लेकिन घायल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हाथ में मौजूद लाठी से बाघ का डटकर मुकाबला किया। उनके इस प्रतिरोध के बाद बाघ पीछे हटकर जंगल की तरफ भाग गया, जिससे गणेश की जान बच गई।
यह घटना गुरुवार दोपहर करीब साढ़े तीन से चार बजे के बीच मुलचेरा वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 521 में हुई, जो वन विकास निगम के क्षेत्र में आता है। गणेश दास उस वक्त जंगल में अपने मवेशी चरा रहे थे। घनी झाड़ियों में छिपे बाघ को उन्होंने भांपा तक नहीं, और बाघ ने अचानक छलांग लगाकर उन पर हमला बोल दिया।
हमले में बाघ का पंजा गणेश के चेहरे पर लगा, जिससे उनके होंठ और गाल समेत शरीर के कई हिस्सों पर गहरी खरोंचें और जख्म आए। इतना गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद गणेश ने धैर्य नहीं खोया। एक पेड़ का सहारा लेकर वे लगातार लाठी से बाघ को रोकते रहे, और आखिरकार उनके इस संघर्ष के आगे बाघ हार मानकर जंगल में गायब हो गया।
बाघ के जाने के बाद भी गणेश ने हिम्मत नहीं छोड़ी। घायल हालत में ही वे पेड़ पर चढ़ गए और वहीं से मोबाइल फोन निकालकर गांव के जान-पहचान वालों को पूरी घटना की खबर दी। सूचना मिलते ही ग्रामीणों के साथ-साथ वन विभाग और वन विकास निगम का अमला मौके की ओर रवाना हो गया।
वन विकास निगम के वन परिमंडल अधिकारी गंजीवार और वन विभाग के वन परिमंडल अधिकारी नीलेश्वर वाडीघरे अपनी टीम के साथ घटनास्थल पहुंचे। टीम ने गणेश को पेड़ से सुरक्षित नीचे उतारा और प्राथमिक उपचार देने के बाद उन्हें चामोर्शी के उप-जिला अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के मुताबिक गणेश के होंठ, गाल और शरीर के दूसरे हिस्सों पर बाघ के पंजों से गंभीर खरोंचें और घाव हैं, लेकिन समय पर इलाज मिलने से अब उनकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है।
गौरतलब है कि इसी दिन सुबह गड़चिरोली तहसील के वसा शिवार में मशरूम लेने गए बालू विट्ठल राउत (45) का शव बाघ के हमले के बाद मिला था। इसके कुछ ही घंटों बाद मुलचेरा में गणेश दास पर बाघ ने हमला किया। एक ही दिन में बाघ के दो हमलों की इन घटनाओं से जंगल से सटे गांवों में दहशत का माहौल बन गया है।
जंगल से सटे और सीमावर्ती इलाकों में खेती और मवेशी चराने के लिए ग्रामीणों को अक्सर जंगल के आसपास जाना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिर्फ सतर्कता बरतने की अपील करने और बैनर लगाने भर से यह समस्या हल नहीं होगी। ग्रामीणों ने वन विभाग से मांग की है कि संवेदनशील इलाकों में पैदल गश्त बढ़ाई जाए, कैमरा ट्रैप के जरिए बाघों की हरकतों पर नजर रखी जाए, और मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।