भीमाशंकर में पेड़ कटने से नीलगाय खेतों में पहुंची, वावे गांव में धान को नुकसान
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
कर्जत तालुका के भीमाशंकर अभयारण्य में टोरंट परियोजना के लिए हुई जंगलतोड़ के बाद जानवर नई जगह तलाश रहे हैं।
कर्जत तालुका के भीमाशंकर अभयारण्य और आसपास के जंगल में टोरंट परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर जंगल की कटाई की गई है। पेड़ कटने से वहां के पशु-पक्षियों का ठिकाना छिन रहा है और वे रहने के लिए दूसरी जगह जंगल ढूंढने लगे हैं। इसी का असर है कि एक नीलगाय और उसका बच्चा उल्हास नदी के पास वावे गांव की हद में दिखाई दिए। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गुस्सा है।
भीमाशंकर अभयारण्य में चल रही जंगल कटाई की वजह से पक्षियों और जानवरों ने वहां से निकलना शुरू कर दिया है। पेड़ खत्म होने के बाद वे अपना नया आवास खोज रहे हैं। अब तक सिर्फ 5000 पेड़ कटे हैं। सवाल यह है कि बाकी 27 हजार पेड़ कटने के बाद यहां पक्षी और जानवर रहेंगे भी या नहीं।
पेड़ों की गिनती को लेकर भी मतभेद है। शासन 32480 पेड़ काटने वाला है, लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि असल में तीन लाख पेड़ कटेंगे।
इस जंगल कटाई की सबसे बड़ी मार जानवरों और पक्षियों पर पड़ रही है। कई जगह जानवर वहां जा रहे हैं जहां अच्छा जंगल और वनसंपदा है। उन्हीं में से एक नीलगाय टोरंट बांध के लिए काटे गए जंगल की जगह से 20 किलोमीटर दूर उल्हास नदी के इलाके में पहुंच गई। शाम के वक्त वावे गांव की हद में नीलगाय और उसका बछड़ा दिखाई दिए।
नीलगाय भाने के खेत में दिखी तो कई लोग इस बात का ध्यान रख रहे थे कि वह उनके खेत में घुसकर धान की फसल खराब न कर दे। लेकिन रात में नीलगाय ने धान के खेत में घुसकर नुकसान कर दिया। इसके बाद किसान पूरी रात नीलगाय को ढूंढते रहे।
उधर, नीलगाय जैसे बहुत सारे जानवर पाली सायडोंगर के जंगल से बाहर निकल आए हैं, जिससे पशु-प्रेमी काफी परेशान हैं। यानी जंगल कटाई का असर सिर्फ जानवरों तक सीमित नहीं है। दूसरे लोगों पर भी इसका उतना ही गंभीर असर दिख रहा है।
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