मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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भीमाशंकर महामार्ग बरसों से अटका, टोरेंट के लिए पेड़ काटने की मंजूरी कैसे मिली: उदय पाटील

भीमाशंकर महामार्ग बरसों से अटका, टोरेंट के लिए पेड़ काटने की मंजूरी कैसे मिली: उदय पाटील तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

कर्जत तालुका से गुजरने वाला भीमाशंकर महामार्ग 20 साल से रुका है, जबकि सायडोंगर में पेड़ कटाई को एक महीने में परमिशन मिल गई। उदय पाटील ने सवाल उठाया है।

कर्जत तालुका से होकर जाने वाले भीमाशंकर महामार्ग का काम 20 साल से अटका पड़ा है। उदय पाटील का कहना है कि सड़क बनाने में पेड़ आड़े आ रहे हैं और वन विभाग परमिशन नहीं देता। तो फिर टोरेंट के लिए बांध बनाने के वक्त वन विभाग को सायडोंगर के पेड़ क्यों नहीं दिखे, यह उनका सीधा सवाल है।

पुणे जिला मुंबई के और करीब आए, इसके लिए पनवेल, नेरळ, कशेळे, भीमाशंकर और मंचर को जोड़ने वाला घाट रास्ता राज्य सरकार के 1980 के रोड डेवलपमेंट प्लान में मंजूर है। भीमाशंकर घाट से गुजरने वाले इस रास्ते के काम का भूमिपूजन 2009 में तब के वित्त मंत्री सुनील तटकरे ने किया था। बताया गया था कि इससे मुंबई से शिरूर का अंतर साठ किलोमीटर घट जाएगा। वक्त की बचत, ईंधन की बचत और उससे प्रदूषण में कमी, इन वजहों से यह सड़क सबके लिए बहुत जरूरी मानी गई।

यह सड़क साढ़े चार किलोमीटर तक वन विभाग की जमीन से गुजरती है। इसके लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वन विभाग को कोलाड में जमीन खरीदकर दी। उस जगह पर बाड़ लगाने, पेड़ लगाने और उन्हें जिंदा रखने का पूरा खर्च भी दिया। इसके बावजूद वन विभाग की कई सख्त शर्तें पूरी करने में निर्माण विभाग को कई साल लग रहे हैं।

निर्माण विभाग ने सड़क के लिए फंड मंजूर किया और काम शुरू भी हुआ। लेकिन इसके बाद वन विभाग ने घाट के सड़क काम को परमिशन देने से मना कर दिया। तभी से निर्माण विभाग नागपुर और भोपाल के चक्कर काट रहा है, फिर भी वन विभाग ने परमिशन नहीं दी है। इसी जंगल में शेखरू नाम का दुर्लभ जानवर मिलने से नई पाबंदियां आ गईं।

कुल मिलाकर, लोगों की जरूरत वाला और ईंधन के जरिए सरकार के हजारों करोड़ रुपये बचाने वाला यह महामार्ग आज तक नहीं बन पाया। इस इलाके के सांसद श्रीरंग बारणे हैं, और जिनके हाथों सड़क के काम का भूमिपूजन हुआ था, वे सुनील तटकरे अब सांसद हैं।

पाटील के मुताबिक जो सड़क 25 साल से वन विभाग ने रोक रखी है, उससे सिर्फ दो-चार किलोमीटर आगे पाली सायडोंगर है। इसी पहाड़ी श्रृंखला के जंगल में सैकड़ों एकड़ पर लाखों पेड़ काटने की परमिशन एक महीने में मिल गई। वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में सैकड़ों पेड़ कट भी चुके हैं।

उदय पाटील ने साफ कहा कि एक प्राइवेट उद्योगपति को लाखभर पेड़ काटने की परमिशन वन विभाग फौरन दे देता है, और सरकारी सड़क पच्चीस साल तक रोकी जाती है। उनके मुताबिक जनता को जो प्रोजेक्ट नहीं चाहिए, वह सरकार उस पर थोप रही है, और कर्जत तालुका सरकार की इस नीति का विरोध करता है।

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