नागपुर में साइकिल चला रहे इंजीनियर सर्वेश करोलीकर की मौत, संजय ट्रैवल्स की बस ने मारी थी टक्कर
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बजाज नगर में 26 अक्टूबर को हुए हादसे में घायल 34 साल के सर्वेश करोलीकर ने सोमवार को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
नागपुर में 34 साल के इंजीनियर सर्वेश करोलीकर की इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें संजय ट्रैवल्स की एक बस ने टक्कर मारी थी। सोमवार को उन्होंने अस्पताल में आखिरी सांस ली। सर्वेश वीएनआईटी (विश्वेश्वरैया नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) से इंजीनियरिंग में टॉपर रह चुके थे। इस मौत के बाद निजी बस ऑपरेटरों की जवाबदेही पर फिर से सवाल उठने लगे हैं।
हादसा 26 अक्टूबर को सुबह करीब 10.30 बजे बजाज नगर इलाके की आरपीटीएस रोड पर असली कॉफी कैफे के पास हुआ। सर्वेश उस वक्त साइकिल से जा रहे थे। तभी मध्य प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर MP-20-ZV-0651 वाली संजय ट्रैवल्स की बस ने उन्हें कथित तौर पर जोरदार टक्कर मार दी।
गंभीर रूप से घायल सर्वेश को पहले स्वास्थ्यम अस्पताल ले जाया गया। बेहतर इलाज के लिए बाद में उन्हें विवेकानंद अस्पताल में शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों की कोशिशों के बावजूद वे बच नहीं पाए और सोमवार को उनकी मौत हो गई। परिवार इस सदमे से टूट गया है।
आरोप है कि टक्कर मारने के बाद बस का ड्राइवर मौके से भाग गया। बजाज नगर पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 लगाई है।
यह संजय ट्रैवल्स की बस से जुड़ा पहला गंभीर हादसा नहीं है। पिछले पांच महीनों में इसी ऑपरेटर की बसों के दो और बड़े हादसे सामने आ चुके हैं। 9 सितंबर को नागपुर के वैष्णोदेवी चौक के पास इसी कंपनी की एक बस ने दोपहिया वाहन को टक्कर मार दी थी। इसमें एक महिला और उनकी चार साल की बेटी गंभीर रूप से घायल हुईं। उससे पहले 4 जून को नागपुर से पुणे जा रही संजय ट्रैवल्स की एक बस समृद्धि एक्सप्रेसवे पर टिपर ट्रक से टकरा गई थी। उस हादसे में 19 यात्री घायल हुए, जिनमें से चार की हालत गंभीर बताई गई थी।
पांच महीनों में तीन गंभीर हादसे हो चुके हैं और अब एक नौजवान इंजीनियर की जान जा चुकी है। इससे कंपनी की बसों के रखरखाव, ड्राइवरों की निगरानी और सड़क सुरक्षा के नियम लागू कराने में परिवहन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तीनों हादसों के हालात अलग हो सकते हैं, लेकिन इन्हें साथ रखकर देखें तो ऑपरेटर के सेफ्टी नियमों के पालन और उसकी बसों पर निगरानी की गहरी जांच की जरूरत दिखती है।
सवाल यह भी उठ रहे हैं कि क्या इन बसों की तय समय पर मैकेनिकल जांच होती है, और ब्रेक, टायर और स्टीयरिंग जैसे अहम पुर्जे ठीक से परखे जाते हैं या नहीं। लंबे सफर पर निकलने से पहले ड्राइवर ट्रेंड, मेडिकली फिट और पूरी तरह आराम किए हुए हैं या नहीं, और उनके ड्यूटी के घंटों पर नजर रखी जाती है या नहीं, यह भी पूछा जा रहा है। साथ ही यह सवाल है कि परिवहन विभाग निजी ऑपरेटरों की असली जांच करता है या सिर्फ फिटनेस सर्टिफिकेट और कागजों के भरोसे रहता है। हादसे वाली बस मध्य प्रदेश में रजिस्टर्ड थी, इसलिए दूसरे राज्यों की कमर्शियल गाड़ियों की निगरानी पर भी सवाल उठता है।
जांच में टक्कर के सही हालात, ड्राइवर के बर्ताव और बस की मैकेनिकल हालत का पता लगना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि परिवहन सुरक्षा नियमों के किसी उल्लंघन का इस हादसे में हाथ था या नहीं। पिछले दो हादसों की भी पड़ताल होनी चाहिए कि रखरखाव, ड्राइवर मैनेजमेंट या सेफ्टी नियमों में कोई एक जैसी कमी तो नहीं निकलती। अगर जांच में ऑपरेटर के मैनेजमेंट या रखरखाव के स्तर पर चूक मिलती है, तो जिम्मेदारी सिर्फ ड्राइवर पर खत्म नहीं होनी चाहिए। परिवहन विभाग और पुलिस से अपेक्षा है कि वे जवाबदेही तय करें।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।