सोम‌वार, 2 नवंबर 2026

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सिंदेवाही में एक हफ्ते के अंदर बाघ ने तीन लोगों की जान ली, गांववालों ने मांगा तुरंत इंतजाम

सिंदेवाही में एक हफ्ते के अंदर बाघ ने तीन लोगों की जान ली, गांववालों ने मांगा तुरंत इंतजाम तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

नवरगाव उपवन क्षेत्र के धुमनखेडा में शुक्रवार को 75 साल के रामाजी मेश्राम की मौत हुई। एक हफ्ते में तालुका में बाघ के हमले से यह तीसरी जान गई है।

सिंदेवाही तालुका में बाघ का खौफ बढ़ता जा रहा है। सिंदेवाही वनपरिक्षेत्र के नवरगाव उपवन क्षेत्र में आने वाले धुमनखेडा में शुक्रवार को बाघ के हमले में रामाजी मेश्राम की मौके पर ही मौत हो गई। वे 75 साल के थे और धुमणखेडा के ही रहने वाले थे। सिर्फ एक हफ्ते में तालुका में बाघ के हमले से किसी बेकसूर की जान जाने की यह तीसरी घटना है, इसलिए पूरे इलाके में दहशत फैल गई है। वन विभाग के रवैये को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है।

पिछले कुछ दिनों से सिंदेवाही तालुका में इंसान और जंगली जानवर का टकराव चरम पर पहुंच गया है। पहली घटना 24 अक्टूबर को शाम के वक्त हुई थी। पलसगाव (जाट) के नानाजी नारायण कामडी, जिनकी उम्र 55 साल थी, खेत में काम कर रहे थे। तभी घात लगाकर बैठे धारीदार बाघ ने उन पर जोरदार हमला किया और उन्हें मार डाला।

इस घटना को 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि 25 अक्टूबर को दोपहर में दूसरी वारदात हो गई। भेंडाला के खेतों में तिल की कटाई कर रही आंगनवाडी सेविका प्रेमीला पुंडलिक महाडोरे पर बाघ ने झपट्टा मारा और उन्हें वहीं मार डाला। प्रेमीला 56 साल की थीं और भेंडाला की रहने वाली थीं।

इसके बाद शुक्रवार को तीसरी घटना में रामाजी मेश्राम की जान गई। यानी एक हफ्ते में दो पुरुष और एक महिला बाघ का शिकार बने। इससे किसानों, खेत मजदूरों और गांववालों में डर बैठ गया है।

इन दिनों खेतों में धान की कटाई और दूसरे काम चल रहे हैं। किसानों को रोज खेत जाना पड़ता है, लेकिन इलाके में बाघ की आवाजाही बढ़ने से खेत जाना भी खतरे से खाली नहीं रहा। बार-बार ऐसी घटनाएं होने से लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। नाराज गांववाले मांग कर रहे हैं कि इस नरभक्षी बाघ का तुरंत बंदोबस्त किया जाए, उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए और पीड़ित परिवारों को फौरन आर्थिक मदद दी जाए।

नवरगाव शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल बोडणे ने कहा, "नवरगाव परिसर के लोगों की जान बचाने के लिए बाघ का तुरंत बंदोबस्त किया जाए। इसके लिए पिंजरे लगाए जाएं, नियमित गश्त बढ़ाई जाए, जरूरी जगहों पर कैमरे लगाए जाएं और बाघ को सुरक्षित तरीके से पकड़ने के लिए फौरन विशेष टीम तैनात की जाए। 48 घंटे के अंदर बाघ का बंदोबस्त करके लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिया जाए। नहीं तो लोगों को साथ लेकर वन विभाग के दफ्तर का घेराव किया जाएगा।"

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