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पनवेल-कर्जत दोहरी रेलवे लाइन के लिए 9.1321 हेक्टर वन भूमि देने का सरकारी आदेश जारी

पनवेल-कर्जत दोहरी रेलवे लाइन के लिए 9.1321 हेक्टर वन भूमि देने का सरकारी आदेश जारी तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
शहर PT24 टीम

राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर को आदेश निकाला। प्रोजेक्ट का करीब 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और साल के आखिर तक 40 से 50 लोकल फेरियां शुरू करने का प्लान है।

पनवेल-कर्जत उपनगरीय रेलवे लाइन के प्रोजेक्ट में अब बड़ी हलचल हुई है। राज्य सरकार ने 30 अक्टूबर को सरकारी आदेश जारी किया है। इसके तहत पनवेल-कर्जत दोहरी रेलवे लाइन के लिए रायगड जिले की 9.1321 हेक्टेयर वन भूमि दूसरे इस्तेमाल के लिए दी जाएगी। मुंबई महानगर क्षेत्र के रेल सफर की तस्वीर बदलने के लिहाज से यह रूट अहम माना जा रहा है और लोग काफी दिनों से इसका इंतजार कर रहे थे।

केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को 11 नवंबर 2025 को आखिरी मंजूरी दी थी। उसके बाद राज्य सरकार ने यह आदेश निकाला। इससे पहले केंद्र के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नागपुर स्थित क्षेत्रीय दफ्तर ने 30 मई 2022 को इसे सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। जरूरी शर्तें पूरी होने के बाद नवंबर 2025 में फाइनल मंजूरी मिली।

यह जमीन तीन तालुकों के आठ गांवों की है। पनवेल तालुका के बेलवली, भिंगार, बारवई और भेर्ले गांव, खालापुर तालुका के लोधिवली और वावर्ले गांव, और कर्जत तालुका के किरवली और वंजाळे गांव की वन भूमि ली जाएगी। इसे मुंबई रेल विकास कॉर्पोरेशन लिमिटेड की दोहरी रेलवे लाइन के काम में इस्तेमाल किया जाएगा।

मुंबई शहरी परिवहन प्रोजेक्ट-3, यानी एमयूटीपी-3 के तहत मुंबई रेल विकास निगम यह 29.6 किलोमीटर लंबी दोहरी लाइन बना रहा है। इस प्रोजेक्ट के लिए 2,782 करोड़ रुपये का खर्च मंजूर हुआ है। काम पूरा होने के बाद यह रूट मध्य रेलवे को सौंपा जाएगा। शुरुआत में रोज 40 से 50 साधारण लोकल फेरियां चलाने का प्लान है। यात्रियों का रिस्पॉन्स और मांग देखकर आगे एसी लोकल शुरू करने पर भी विचार है।

एमआरवीसी के चीफ मैनेजर, कॉर्पोरेट को-ऑर्डिनेशन सुनील उदासी ने जानकारी दी है कि प्रोजेक्ट के ज्यादातर काम पूरे हो चुके हैं। काम की मौजूदा हालत इस तरह है:

9 बड़े पुलों और 35 छोटे पुलों का काम पूरा हो गया है। 5 उड्डाणपुल और 16 अंडरपास भी तैयार हैं। पनवेल और कर्जत के रेलवे उड्डाणपुल पूरे हो चुके हैं। नियोजित 69.70 किलोमीटर पटरियों में से 68.70 किलोमीटर की जोड़ाई हो चुकी है। पनवेल, मोहोपे और चिखले स्टेशन सेवा में हैं, जबकि चौक स्टेशन की इमारत और अंडरपास का काम पूरा हो गया है। सिग्नल सिस्टम का 95 प्रतिशत काम हो चुका है। तीनों सुरंगों की खुदाई, अंदरूनी लाइनिंग और उनके अंदर पटरियों का काम भी पूरा है।

इस प्रोजेक्ट का मुख्य मकसद पनवेल और कर्जत के बीच मौजूदा रूटों की भीड़ कम करना है। नया रूट चालू होने पर बदलापुर और अंबरनाथ के यात्री ठाणे स्टेशन का चक्कर लगाए बिना सीधे लोकल से पनवेल जा सकेंगे। नवी मुंबई, कर्जत और रायगड इलाके के यात्रियों को सड़क के मुकाबले सस्ता और तेज विकल्प मिलेगा। महामुंबई में उपनगरीय रेल सेवा का दायरा भी बढ़ेगा।

वन भूमि का आदेश जारी होने से प्रोजेक्ट की एक अहम प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी हो गई है। बाकी काम निपटाकर साल के आखिर तक 40 से 50 लोकल फेरियों के साथ यह रूट यात्रियों के लिए खोलने का प्लान है। ऐसे में पनवेल, नवी मुंबई, कर्जत और रायगड के रेल यात्रियों का इंतजार जल्द खत्म होने की उम्मीद है।

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