सयाजी शिंदे बोले, सह्याद्री का एक भी पेड़ बिना विरोध के नहीं कटने देंगे
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अभिनेता और पर्यावरण कार्यकर्ता सयाजी शिंदे ने नागपुर में सह्याद्री बचाओ मुहिम के तहत सरकार से पेड़ों का जिलावार हिसाब मांगा।
नागपुर: जाने-माने अभिनेता और पर्यावरण कार्यकर्ता सयाजी शिंदे ने महाराष्ट्र में पेड़ों की बेतहाशा कटाई पर सख्त नाराजगी जताई है। उन्होंने साफ कहा कि सह्याद्री पर्वतमाला का एक भी पेड़ बिना विरोध के नहीं कटने दिया जाएगा। शिंदे के मुताबिक जब तक राज्य सरकार कोई ठोस नीति घोषित नहीं करती और इन संवेदनशील पहाड़ियों को बचाने के लिए पक्के कदम नहीं उठाती, तब तक यह आंदोलन चलता रहेगा।
शिंदे 'सह्याद्री बचाओ' पर्यावरण मुहिम की तरफ से रखी गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर जंगल उजाड़े जा रहे हैं और इससे उन्हें गहरी पीड़ा होती है। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठाया। उनकी मांग है कि राज्य सरकार जिलावार बताए कि कितने पेड़ लगाए गए और कितने काटे गए। शिंदे का तर्क था कि महाराष्ट्र की हरियाली की असली हालत जानने का हक आम लोगों को है।
शिंदे ने कहा, "इंसान पेड़ों की वजह से जिंदा है, पेड़ इंसान के भरोसे नहीं जीते।" उनका कहना था कि विकास पेड़ों की अंधाधुंध कटाई का बहाना नहीं बन सकता। उन्होंने मौजूदा कानूनों में जरूरी बदलाव करने की भी मांग की, ताकि पेड़ बचाने को पहली प्राथमिकता मिले।
शिंदे ने दावा किया कि महाराष्ट्र के भौगोलिक क्षेत्र का सिर्फ 17 प्रतिशत हिस्सा ही जंगल से ढका है। उन्होंने सरकार से पूछा कि क्या वह महाराष्ट्र की शान माने जाने वाले सह्याद्री को रेगिस्तान बनाना चाहती है। उन्होंने तीखी बात कहते हुए कहा कि एक तरफ राज्य दिवाली की तैयारी में है और दूसरी तरफ सह्याद्री की होलिका दहन जैसी हालत की जा रही है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पेड़ों की कटाई इतने बड़े पैमाने पर हो रही है कि यह सिर्फ पर्यावरण का मामला नहीं, बल्कि बड़ा जंगल घोटाला है।
शिंदे ने लोगों से अपील की कि वे पेड़ों की अहमियत समझें और पर्यावरण बचाने में खुद आगे आएं। उन्होंने कहा, "हमारी मां के बाद पेड़ ही हमारी जिंदगी को संभालता है।" उनके मुताबिक सह्याद्री को बचाने की लड़ाई सिर्फ पेड़ों की नहीं है। यह पर्यावरण के संतुलन, पानी के स्रोतों और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को बचाने की लड़ाई है।
इसी बीच नागपुर में 'थाली बजाओ' आंदोलन होने वाला है। ग्रीन नागपुर की तरफ से यह आंदोलन सोमवार, 2 नवंबर को शाम 4.30 बजे से 6.30 बजे के बीच संविधान चौक (आरबीआई चौक) पर रखा गया है। आयोजकों के मुताबिक शिंदे के इसमें शामिल होने की उम्मीद है। आयोजकों ने नागपुरवासियों से अपील की है कि वे घर से थाली और चम्मच लेकर आएं और सह्याद्री की बर्बादी के खिलाफ मिलकर आवाज उठाएं।
मुहिम चलाने वालों ने याद दिलाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज को स्वराज्य खड़ा करने में सह्याद्री से ही कुदरती किले जैसी ताकत मिली थी। उन्हें दुख है कि आज वही पहाड़ियां बेलगाम पेड़ कटाई के खतरे में हैं। आयोजकों ने लोगों को चेताते हुए कहा, "आज चुप रहे तो कल पानी और सांस लेने की हवा भी खो सकते हैं।"
यह मुहिम पर्यावरण की रक्षा को जन आंदोलन बनाना चाहती है और लोगों से कहती है कि सिर्फ चिंता जताने से आगे बढ़कर जंगलों की तबाही का खुलकर विरोध करें। मुहिम की केंद्रीय मांग साफ है कि सरकार बताए कि कितने पेड़ कम हुए, इसकी वजह क्या है, और ठोस कार्रवाई से दिखाए कि विकास के नाम पर पर्यावरण की बलि नहीं दी जाएगी।
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