बचपन में झुलसी मिताली सोनावणे ने निशानों के साथ मॉडलिंग में बनाई अपनी पहचान
पाँच साल की उम्र में गरम पानी से झुलसी मिताली सोनावणे ने एक विशेष पॉडकास्ट में अपने संघर्ष और सुपरमॉडल बनने के सफर पर खुलकर बात की।
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मिताली सोनावणे पाँच साल की थीं, जब एक हादसे ने उनकी ज़िंदगी की दिशा बदल दी। नवरात्रि के मौके पर हुए एक विशेष पॉडकास्ट में उन्होंने अपने बचपन, इलाज के दिनों, मॉडलिंग के सफर और सोशल मीडिया पर मिलने वाली अच्छी-बुरी प्रतिक्रियाओं के बारे में दिल खोलकर बातें कीं।
मिताली ने बताया कि हादसे से ठीक पहले उनका परीक्षा का नतीजा आया था और उन्हें 97 प्रतिशत अंक मिले थे। उन्हीं दिनों वे रिश्तेदारों के घर गई हुई थीं। घर में गरम पानी से जुड़ा काम चल रहा था और वे हाथ में खिलौने और कुछ चीज़ें लेकर सीढ़ियों से नीचे उतर रही थीं। अचानक गरम पानी पैर पर गिरा, उनका संतुलन बिगड़ा और वे नीचे गिर पड़ीं। गरम पानी उनके शरीर पर फैल गया और वे बुरी तरह झुलस गईं। इसके बाद इलाज, दर्द और शरीर में आए बदलावों का मुश्किल दौर शुरू हुआ।
इलाज के दिनों के बारे में मिताली ने कहा कि उन्हें बहुत दर्द सहना पड़ा। वे छोटी थीं, इसलिए शुरू में उन्हें पूरी तरह अंदाज़ा नहीं था कि ये निशान उम्र भर उनके शरीर पर रह सकते हैं। इलाज के बाद जब उन्होंने खुद को आईने में देखा, तो मन में एक अलग ही एहसास आया। उनके लिए सबसे बड़ी बात यह थी कि वे ज़िंदा हैं और घर लौट आई हैं। उन्होंने यह नज़रिया बनाया कि ये निशान उनकी ज़िंदगी का हिस्सा हैं और इन्हीं के साथ आगे बढ़ना है।
मिताली के मुताबिक अपने आपको अपनाना आत्मविश्वास की पहली सीढ़ी है। उन्होंने निशानों को छिपाने के बजाय उनके साथ भरोसे से जीने का रास्ता चुना। उनका कहना है कि दूसरे लोग हमारे बारे में क्या सोचते हैं, उससे ज़्यादा मायने यह रखता है कि हम खुद को किस नज़र से देखते हैं। मॉडलिंग में खूबसूरती, त्वचा और कद-काठी को लेकर कई अपेक्षाएँ होती हैं, लेकिन उन्होंने उन अपेक्षाओं में खुद को ढालने के बजाय अपनी अलग पहचान को अपनाया और ज़ख्मों को अपनी तरक्की में रुकावट नहीं माना।
सोशल मीडिया पर उनके करीब 12 हजार फॉलोअर्स हैं और मिताली के मुताबिक ये सब असली हैं। सिर्फ नाम कमाने के लिए फॉलोअर्स खरीदने की ज़रूरत उन्हें महसूस नहीं होती। उन्होंने बताया कि उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से जुड़ी पढ़ाई भी की है, फिर भी वे बनावटी लोकप्रियता के बजाय असली दर्शकों से जुड़े रहना पसंद करती हैं।
अपने काम के मकसद पर मिताली ने कहा कि हज़ारों लोग उनका काम देखें, इससे ज़्यादा संतोष इस बात में है कि किसी एक को भी उनके सफर से हौसला मिल जाए। नेगेटिव कमेंट्स के बारे में उनका कहना था कि सौ अच्छे कमेंट्स के बीच एक बुरा कमेंट भी ध्यान खींच लेता है, लेकिन उससे अपना आत्मविश्वास कम नहीं होने देना चाहिए। ऐसे कमेंट इस बात का संकेत भी हो सकते हैं कि आपका काम ज़्यादा लोगों तक पहुँच रहा है, इसलिए उन्हें नज़रअंदाज़ कर अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।
इस पूरे सफर में परिवार का साथ उनके लिए बड़ा सहारा रहा। बातचीत में मिताली ने अपनी माँ और करीबी लोगों का ज़िक्र किया।