दीक्षाभूमि पर 70वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस पर उमड़े अनुयायी, गूंजा बुद्धं शरणं गच्छामि
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नागपुर की दीक्षाभूमि पर बुधवार को 70वें धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस की वर्षगांठ बड़े उत्साह से मनाई गई। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने वंचित समाज को अज्ञान के अंधकार से निकालकर समता, स्वाभिमान और प्रबोधन का रास्ता दिखाया था। उसी ऐतिहासिक घटना की याद में यह दिन मनाया गया।
हजारों बौद्ध अनुयायी दीक्षाभूमि पहुंचे और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर तथा तथागत गौतम बुद्ध को नमन किया। सुबह से ही अनुयायियों की भीड़ जुटने लगी थी। उधर शहर के सैकड़ों बुद्ध विहारों में सामूहिक बुद्ध वंदना, पूजन, प्रबोधन पर व्याख्यान, बुद्ध-भीम गीत और भोजनदान के कार्यक्रम हुए।
सफेद कपड़े पहने उपासक-उपासिकाओं ने कतारों में खड़े होकर डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर और तथागत बुद्ध के अस्थिकलश को अभिवादन किया। भिक्खु संघ की मौजूदगी में मुख्य स्तूप में बुद्ध वंदना हुई। इसके बाद समता सैनिक दल के सैनिकों ने तथागत बुद्ध और बाबासाहेब को सलामी दी। 'बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि' के जयघोष से पूरा परिसर गूंज उठा। अभिवादन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा।
नागपुर की अलग-अलग बस्तियों से सामाजिक संगठनों ने धम्म रैलियां निकालीं और दीक्षाभूमि पहुंचकर अभिवादन किया। संविधान चौक पर भी बाबासाहेब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करके श्रद्धांजलि दी गई। भीड़ को देखते हुए पुलिस प्रशासन और समता सैनिक दल ने सुरक्षा और व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली।
20 अक्टूबर को अशोक विजयादशमी के मौके पर मुख्य धम्मदीक्षा समारोह होना है, इसलिए दीक्षाभूमि परिसर में बौद्ध साहित्य के स्टॉल लगाए गए हैं। बुद्ध और बाबासाहेब की प्रतिमाओं, किताबों और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन से जुड़ी संस्थाओं के स्टॉल पर दिनभर अनुयायियों की भीड़ रही। अभिवादन के लिए पहुंचे कई परिवारों ने परिसर की हरियाली में बैठकर साथ बैठकर भोजन किया।
बुद्ध-भीम गीतों से माहौल उत्साह से भरा रहा। शहर के अलग-अलग इलाकों में भी अनुयायियों ने एकजुट होकर धम्मचक्र प्रवर्तन दिवस मनाया। देश-विदेश से लाखों की संख्या में अनुयायी दीक्षाभूमि पहुंचे और दर्शन किया। बड़ी संख्या में लोगों के आने को देखते हुए प्रशासन ने सारी तैयारियां कर रखी थीं। अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के लिए कड़ा पुलिस बंदोबस्त भी तैनात किया गया था।