शुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026

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अवनी सोसायटी केस: रिपोर्ट से पहले सोमनाथ केकाण के महापालिका में आने पर रोक

अवनी सोसायटी केस: रिपोर्ट से पहले सोमनाथ केकाण के महापालिका में आने पर रोक तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
PT24 टीम

वाशी की अवनी सोसायटी के पुनर्विकास पर उठे सवालों के बाद महापौर ने परमिशन रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने को कहा है।

नवी मुंबई के वाशी सेक्टर 9 की अवनी सहकारी गृह निर्माण संस्था के पुनर्विकास का मामला नवी मुंबई महानगरपालिका में बड़ा विवाद बन गया है। पुनर्विकास के लिए मंजूर 2.00 एफएसआई, 32 मीटर चौड़ी सड़क, बिल्डिंग परमिशन और प्लॉट के डेवलपमेंट राइट्स को लेकर नगर रचना विभाग के सहायक संचालक सोमनाथ केकाण पर गंभीर आपत्तियां उठीं। इसके बाद महापालिका ने सख्त रुख अपना लिया है।

खास बात यह है कि पूरी जांच की रिपोर्ट आम सभा के सामने आने से पहले ही महापौर की तरफ से संबंधित बिल्डिंग परमिशन रद्द करने की कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही महापौर ने महापालिका को आदेश दिया है कि जांच रिपोर्ट सदन में पेश होने तक केकाण को महापालिका की इमारत में घुसने न दिया जाए।

इसी वाशी सेक्टर 9 की 'नैवेद्य' और 'अलबेला' इमारतों के मामले में राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच समिति ने केकाण को पूरी तरह क्लीन चिट दे दी है। इसके बावजूद अब अवनी मामले में रिपोर्ट आने से पहले ही सत्ताधारी भाजपा ने उन पर कार्रवाई का शिकंजा कस दिया है।

महापालिका की 13 अक्टूबर 2026 की स्थगित आम सभा में विषय क्रमांक 61 के तहत यह मुद्दा उठा। 8 सितंबर 2026 के प्रस्ताव के सिलसिले में इसे सदन के सामने रखा गया था। वाशी की अवनी सोसायटी और एयर इंडिया एम्प्लॉइज महाराजा सहकारी गृह निर्माण संस्था के प्लॉटों के पुनर्विकास को लेकर कई तकनीकी और कानूनी सवाल उठाए गए।

भाजपा के पार्षद भरत नखाते ने वाशी सेक्टर 9 के प्लॉट क्रमांक 16 और कन्डोमिनियम क्रमांक 16 की इमारत क्रमांक 47 से 60 के पुनर्विकास पर सवाल रखे। रिकॉर्ड के मुताबिक इन प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल करीब 6,288.39 वर्ग मीटर है। इस पुनर्विकास के लिए 3.00 एफएसआई मंजूर किया गया है। सवाल यह है कि क्या संबंधित संस्थाओं को 32 मीटर चौड़ी सड़क का फायदा सच में मिल सकता है।

बताया गया कि इस 32 मीटर सड़क का कुछ हिस्सा अवनी संस्था के प्लॉट से लगता है। लेकिन सदन में कहा गया कि सड़क के इस्तेमाल के लिए जरूरी सहमति, रजिस्टर्ड करार, डेवलपमेंट राइट्स और सिडको की इजाजत को लेकर तस्वीर साफ होनी चाहिए।

नखाते ने मांग की कि यूडीसीपीआर नियमों के प्रावधान, एंट्री रोड की जरूरी चौड़ाई और प्लॉट का असली क्षेत्रफल जांचा जाए। रिकॉर्ड के आधार पर यह भी परखने को कहा गया कि संस्थाओं को 32 मीटर सड़क का हक है या नहीं, और क्या उसी आधार पर अतिरिक्त एफएसआई दिया गया। मंजूर नक्शे, बिल्डिंग परमिशन, प्रारंभ प्रमाणपत्र, संशोधित परमिशन, प्रीमियम, इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्जेस, टीडीआर और अन्सिलरी एफएसआई के कागजात भी जांचे जाएंगे।

सबसे अहम फैसला यह है कि मंजूरी की प्रक्रिया में गड़बड़ी मिली तो बिल्डिंग परमिशन और प्रारंभ प्रमाणपत्र रद्द करने के लिए जरूरी कानूनी कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसमें संबंधितों को नोटिस देकर उनका पक्ष सुनना, कारण बताओ नोटिस देना और फिर कारणों के साथ अंतिम आदेश जारी करना शामिल है। अगर साबित हुआ कि गलत जानकारी दी गई या अहम तथ्य छिपाए गए, तो मंजूरी रद्द करने की कार्रवाई होगी। अंतिम रिपोर्ट से पहले ही प्रशासन को परमिशन रद्द करने की दिशा में कदम उठाने को कहा गया है, इसीलिए इस फैसले की चर्चा है।

महापौर ने पूरे मामले के रिकॉर्ड और रिपोर्ट मंगवाकर उनका बारीकी से अध्ययन करने का भी आदेश दिया है। केकाण की एंट्री पर रोक का आदेश आयुक्त को दिया गया है। रिकॉर्ड, मंजूरी के दस्तावेज, सिडको की इजाजत, सड़क के हक और एफएसआई की गिनती की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट अगली आम सभा में रखने की जिम्मेदारी प्रशासन को सौंपी गई है।

अधिकारियों पर कार्रवाई को लेकर कानून क्या कहता है, यह भी अहम है। महाराष्ट्र महानगरपालिका अधिनियम, 1949 और प्रशासकीय कानूनों के मुताबिक महासभा नीतिगत फैसले लेने वाली संस्था है। उसे प्रस्ताव पास करने का अधिकार है, लेकिन किसी अधिकारी को सीधे सस्पेंड करने या दफ्तर आने से रोकने का वैधानिक अधिकार एमएमसी एक्ट में महासभा को नहीं दिया गया है। इस अधिनियम की धारा 56 के तहत महापालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई, सस्पेंशन या दूसरी सजा तय करने के प्राथमिक अधिकार महापालिका आयुक्त के पास हैं।

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