नवी मुंबई महासभा: गायकवाड का निलंबन खत्म, गाडे का निलंबन बरकरार, समिति करेगी जांच
नवी मुंबई महापालिका की तहकूब महासभा में डॉ. कैलास गायकवाड का निलंबन रद्द हुआ, जबकि प्रवीण गाडे का निलंबन कायम रखकर उनकी जांच तदर्थ समिति को सौंपी गई।
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नवी मुंबई महापालिका की स्थगित महासभा मंगलवार को हुई और उसमें दो अफसरों के निलंबन पर फैसला लिया गया। अतिक्रमण विभाग के उपायुक्त डॉ. कैलास गायकवाड का निलंबन रद्द कर दिया गया, जबकि विद्युत विभाग के कार्यकारी अभियंता प्रवीण गाडे का निलंबन बरकरार रखने के निर्देश महापौर ने दिए।
गायकवाड को रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित किया गया था। आरोप है कि अतिक्रमण विभाग के एक ठेकेदार का अटका हुआ बिल मंजूर करने के लिए उन्होंने रिश्वत ली थी। इसी मामले में भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने उन्हें पालिका मुख्यालय में रंगेहाथ पकड़ा था।
महासभा में विषय संख्या ११ पर चर्चा के दौरान सदन नेता सागर नाईक ने यह मुद्दा रखा। उसके बाद पूर्व महापौर जयवंत सुतार ने सुझाव दिया कि गायकवाड का निलंबन खत्म किया जाए और उन्हें अतिक्रमण विभाग को छोड़कर किसी और विभाग में उपायुक्त के तौर पर काम पर लगाया जाए। महापौर सुजाता पाटील ने इस सुझाव को मंजूर करने का ऐलान किया।
यहां एक बात साफ रहनी चाहिए। निलंबन रद्द हो जाने का मतलब यह नहीं कि गायकवाड पर रिश्वत के मामले में लगे आरोप खत्म हो गए। वे आरोप अपनी जगह बने हुए हैं।
गाडे के मामले में चर्चा कुछ अलग रही। उनके निलंबन का विषय आया तो सदस्यों ने उनके कामकाज के तरीके और विद्युत विभाग के अलग-अलग ठेकों को लेकर सवाल उठाए। नेरूळ में खुले बिजली के तारों की वजह से दो छात्राओं को करंट लगा था, और उसी घटना के बाद गाडे को निलंबित किया गया था।
इसके बावजूद सदस्यों का आरोप था कि गाडे अब भी काम कर रहे हैं। भाजपा के पार्षद सूरज पाटील ने उनके कामकाज की जांच की मांग की। मनसे के पार्षद अभिजित देसाई ने कहा कि प्रशासक काल में नेरूळ इलाके में करीब १२ करोड़ रुपये के बिजली के काम हुए, और उन कामों की भी जांच होनी चाहिए।
चर्चा के बाद महापौर सुजाता पाटील ने गाडे का निलंबन कायम रखने का फैसला सुनाया। उन्होंने कहा कि उनके कामकाज की गहराई से जांच के लिए मामला तदर्थ समिति को सौंपा जाए और उसके बाद विस्तृत प्रस्ताव दोबारा महासभा के सामने लाया जाए।
महापौर ने यह भी साफ किया कि जांच पूरी होने तक गाडे को किसी भी दूसरे विभाग में काम पर नहीं रखा जाएगा। यानी उनका निलंबन जारी रहेगा। दूसरी तरफ पालिका में यह चर्चा भी जोरों पर रही कि गाडे पर की गई कार्रवाई राजनीतिक मकसद से प्रेरित है।