सांगली जिला बैंक चुनाव: विधायक सुरेश खाडे समेत सात नामांकन रद्द, पाटील-पडलकर के अर्ज वैध
सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में जांच के बाद 295 अर्ज वैध रहे, अब सबकी नजर नाम वापसी पर है।
सांगली जिला मध्यवर्ती सहकारी बैंक के चुनाव में नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो गई। इसमें भाजपा के विधायक सुरेश खाडे और सांसद विशाल पाटील की पत्नी पूजा पाटील समेत सात उम्मीदवारों के अर्ज अवैध ठहराए गए। वहीं सांसद विशाल पाटील, विधायक गोपीचंद पडलकर, विधायक सत्यजित देशमुख और अनिता सगरे के अर्जों पर उठी आपत्तियां खारिज कर दी गईं और उनके अर्ज वैध माने गए।
बैंक की 21 सीटों के लिए कुल 351 अर्ज दाखल हुए थे। जांच के बाद सात अर्ज अवैध ठहरे और 295 अर्ज वैध रहे। अब सबकी नजर नाम वापसी की प्रक्रिया पर है।
विधायक सुरेश खाडे ने सोसायटी वर्ग के साथ अनुसूचित जाति वर्ग से भी अर्ज भरा था। उनकी सदस्यता की अवधि और अर्ज के साथ लगे कागजात पर आपत्ति उठाई गई थी। जांच और सुनवाई के बाद उनके दोनों अर्ज अवैध ठहरे, यानी वे चुनाव की दौड़ से बाहर हो गए हैं। अब देखना है कि खाडे इस फैसले के खिलाफ कानूनी रास्ता अपनाते हैं या नहीं।
सांसद विशाल पाटील की पत्नी पूजा पाटील के मिरज सोसायटी वर्ग वाले अर्ज पर सदस्यता की अवधि और कागजात को लेकर आपत्ति थी, और यह अर्ज अवैध ठहरा। लेकिन महिला आरक्षित और नागरी बैंक और पतसंस्था वर्ग में उनके अर्ज वैध रहे, इसलिए उनकी उम्मीदवारी बनी हुई है।
विधायक गोपीचंद पडलकर के अर्ज पर पूर्व विधायक विक्रमसिंह सावंत और बाजार समिति के पूर्व सभापति सुजय शिंदे ने आपत्ति उठाई थी। यह आपत्ति उनकी सदस्यता और अर्ज के साथ लगे कागजात को लेकर थी। चुनाव निर्णय अधिकारी ने आपत्ति खारिज करके पडलकर का अर्ज वैध ठहराया। सावंत और शिंदे ने बताया है कि वे इस फैसले को चुनौती देने के लिए उच्च न्यायालय जाएंगे। उनके कहने के मुताबिक पडलकर का अर्ज कथित गलत कागजात के आधार पर वैध ठहराया गया है। इन आरोपों की अलग से कोई न्यायिक जांच अभी नहीं हुई है।
सांसद विशाल पाटील के निदेशक पद के दस साल के कार्यकाल को लेकर आपत्ति उठी थी। वह आपत्ति खारिज हो गई, इसलिए उनका अर्ज वैध है। विधायक सुरेश खाडे ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ कोर्ट जाएंगे। इसलिए अब देखना है कि विशाल पाटील की उम्मीदवारी को आगे कानूनी चुनौती मिलती है या नहीं।
विधायक सत्यजित देशमुख के अर्ज पर सहकारी संस्था के बकायादार होने की आपत्ति थी। अनिता सगरे के अर्ज पर भी बकायादार होने की आपत्ति उठी थी। इन आपत्तियों में कोई तथ्य नहीं मिला, इसलिए दोनों के अर्ज वैध ठहरे।
जिन सात उम्मीदवारों के अर्ज अवैध ठहरे, वे हैं: विधायक सुरेश खाडे, पूजा विशाल पाटील, शिल्पा शिवाजी पाटील, अर्जुन नेताजी कांबळे, महादेव रामाना अंकलगी, किसान गणपती जानकर और रामचंद्र सखाराम सरगर।
वर्ग के हिसाब से सीटें और अर्ज इस तरह हैं: सेवा सोसायटी में 10 सीटें और 60 अर्ज, महिला आरक्षित में 2 सीटें और 16 अर्ज, खुला वर्ग में 39 अर्ज, अनुसूचित जाति-जनजाति में 1 सीट और 28 अर्ज, अन्य पिछड़ा वर्ग में 1 सीट और 21 अर्ज, घुमंतू जनजाति में 1 सीट और 26 अर्ज, अन्य खेती संस्था में 1 सीट और 14 अर्ज, प्रक्रिया संस्था में 1 सीट और 16 अर्ज, नागरी बैंक और पतसंस्था में 2 सीटें और 42 अर्ज, और मजदूर संस्था में 2 सीटें और 33 अर्ज।
जांच का चरण पूरा हो गया है, पर चुनाव की अंतिम तस्वीर अभी साफ नहीं है। नाम वापसी के दौरान कौन किसके साथ खड़ा होता है, कौन पीछे हटता है और कौन से पैनल बनते हैं, इसी से आखिरी मुकाबले का रूप तय होगा। प्रमुख नेताओं में विशाल पाटील, गोपीचंद पडलकर और सत्यजित देशमुख की उम्मीदवारी बनी रही, इसलिए सियासी मुकाबला बना हुआ है।