धनुष्यबाण केस: सुप्रीम कोर्ट की बहस के बाद शिंदे गुट के राजू वाघमारे का ठाकरे गुट पर वार
शिवसेना के सहप्रवक्ता डॉ. राजू वाघमारे ने मुंबई में कहा कि ठाकरे गुट के दावे कानून की कसौटी पर नहीं टिके।
मुंबई: शिवसेना पार्टी और धनुष-बाण चिन्ह को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई में आज सुप्रीम कोर्ट में हुई बहस के बाद राजनीतिक माहौल फिर गरम हो गया है। शिवसेना के सहप्रवक्ता डॉ. राजू वाघमारे ने मुंबई में बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि ठाकरे गुट के दावे कानून की कसौटी पर टिक नहीं पाए।
वाघमारे ने कहा कि चुनाव आयोग और विधानसभा अध्यक्ष ने संविधान के प्रावधानों के मुताबिक ही फैसले लिए हैं। उनके मुताबिक ठाकरे गुट का दावा है कि अयोग्यता का केस पेंडिंग हो तो चुनाव आयोग पार्टी और चिन्ह पर फैसला नहीं दे सकता। वाघमारे ने कहा कि शिवसेना के वकील नीरज किशन कौल ने सुभाष देसाई केस का हवाला देकर इस मुद्दे को खारिज कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग को फैसला लेने का अधिकार है, यह दलील कोर्ट में रखी गई।
अयोग्यता के सवाल पर भी शिवसेना की तरफ से अहम बातें रखी गईं, ऐसा वाघमारे ने कहा। उन्होंने दावा किया कि कोर्ट में यह मुद्दा उठाया गया कि कोई विधायक विधानमंडल से अयोग्य हो जाए, तो जरूरी नहीं कि उसका असर सीधे राजनीतिक पार्टी की सदस्यता पर पड़े। वाघमारे के शब्दों में, सिर्फ अयोग्यता का केस दाखिल हो जाने से कोई विधायक अयोग्य नहीं हो जाता, उसकी अयोग्यता साबित होना जरूरी है।
दसवीं अनुसूची के प्रावधानों का हवाला देकर वाघमारे ने दावा किया कि संविधान पीठ ने साफ किया है कि राजनीतिक पार्टी और विधानमंडल में पार्टी अलग-अलग चीजें हैं। उनके मुताबिक इसी वजह से शिवसेना की दलील थी कि दोनों पर एक ही नियम सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
चुनाव आयोग के फैसले पर भी वाघमारे ने बात की। उन्होंने कहा कि आयोग ने बहुमत और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को देखकर फैसला लिया। वाघमारे ने आरोप लगाया कि उद्धव ठाकरे ने 2018 में पार्टी के संविधान में बदलाव किए, लेकिन वह संशोधित संविधान चुनाव आयोग को सौंपा नहीं गया। उनके मुताबिक इसी वजह से आयोग ने पार्टी के संविधान की जगह बहुमत को आधार बनाया और शिवसेना का नाम और धनुष-बाण चिन्ह एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट को दिया।
इसी मुद्दे पर वाघमारे ने ठाकरे गुट की और आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के अंदर लोकतंत्र की जगह ऐसा ढांचा बनाया गया जिसमें सारे अधिकार एक ही व्यक्ति के पास रहें। आज की बहस के बाद ठाकरे गुट के दावों पर फिर से राजनीतिक चर्चा छिड़ने की संभावना है।