तटकरे बोले- अजित पवार होते तो दोनों NCP का विलय होता, अनिल पाटील ने दबाव की बात नकारी
राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे के विलय वाले बयान पर पार्टी नेता अनिल पाटील ने कहा कि उन्हें इसमें प्रेशर टैक्टिस नहीं लगती।
राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा है कि अजित पवार होते तो दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों का विलय हो गया होता। तटकरे के मुताबिक विलय की चर्चा हुई थी और इसकी जानकारी उन्हें अजितदादा ने दी थी। इस बयान से दोनों राष्ट्रवादी के विलय की चर्चा को फिर हवा मिल गई है।
यह भी कहा जा रहा है कि ऐसा बयान देकर तटकरे ने एक तरह से उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार पर दबाव बनाने की शुरुआत की है। इस पर अजितदादा गुट के नेता अनिल पाटील ने सीधी प्रतिक्रिया दी है।
अनिल पाटील ने कहा कि उन्हें यह प्रेशर टैक्टिस नहीं लगती। उनके मुताबिक चार दिन से कोर कमेटी की बैठकें चल रही हैं और पार्टी के नेता एनडीए के नेताओं से बात कर रहे हैं। पाटील ने बताया कि ये नेता महाराष्ट्र की समस्याओं और दूसरे मुद्दों पर चर्चा के लिए गए थे। इसलिए ऐसी मुलाकातों से सुनीता भाभी पर प्रेशर आएगा, ऐसा उन्हें नहीं लगता। उन्होंने यह भी कहा कि सुनीता भाभी से बात करके ही नेताओं ने एनडीए के नेताओं से चर्चा की।
पाटील ने कहा कि पार्टी में फैसले एकमत से होते हैं। अजितदादा होते तो क्या होता, यह विषय अब नहीं रहा। उनके मुताबिक अगर अजितदादा ने कोई फैसला लिया होता तो वे उनके साथ रहते। अब जो भी फैसला होगा, वह सुनीता भाभी के नेतृत्व में होगा।
अनिल पाटील के अनुसार अजितदादा के जाने के वक्त पार्टी के कुछ लोगों ने विलय को लेकर बयान दिए थे। गुट नेता चुनते समय भी विलय के बारे में पूछा गया था। तब प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे और छगन भुजबळ ने कहा था कि ऐसी कोई चर्चा नहीं हुई। पाटील ने बताया कि इन नेताओं ने तब साफ कहा था कि अजितदादा से शरद पवार गुट की चर्चा हुई होगी, पर उनके साथ कोई चर्चा नहीं हुई और उन्हें इसकी कोई जानकारी नहीं है।
पाटील ने बताया कि परसों पार्टी की बैठक हुई थी और उसमें भी तटकरे ने विलय पर कुछ नहीं कहा। उनके मुताबिक अब तटकरे ने यह बयान क्यों दिया, यह उन्हें ही पता होगा और उन्हीं से पूछा जाना चाहिए। पाटील ने कहा कि तटकरे हमेशा यही कहते थे कि दादा ने विलय की चर्चा नहीं की, और जितनी भी बैठकें हुईं, उनमें वे यही बताते रहे। पाटील ने साफ किया कि इस वक्त उनके स्तर तक विलय की कोई बात नहीं है। वरिष्ठ स्तर पर हुई या नहीं, यह उन्हें नहीं पता।
पार्टी में नियुक्तियों के विवाद पर भी पाटील ने बात की। उन्होंने कहा कि दादा के जाने के बाद से नियुक्तियां खाली पड़ी थीं और अब भरी गई हैं। 8 महीने में इन पर कोई फैसला नहीं हुआ था। नियुक्तियां होने के बाद अब चर्चा हो रही है कि क्यों हुईं। पाटील के मुताबिक संगठन की नजर से ये नियुक्तियां अहम होती हैं। उन्होंने कहा कि नियुक्तियों पर प्रदेशाध्यक्ष के दस्तखत होते हैं, मतभेद हो सकते हैं, पर फैसला एकमत से ही होता है।
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