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मुश्रीफ और बेटों को ईडी केस में राहत, पर वकील सरोदे बोले, फैसले को चुनौती दी जा सकती है

मुश्रीफ और बेटों को ईडी केस में राहत, पर वकील सरोदे बोले, फैसले को चुनौती दी जा सकती है तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

विशेष पीएमएलए कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की क्लोजर रिपोर्ट मंजूर की। वरिष्ठ वकील असीम सरोदे ने कहा कि इस फैसले को कानूनी चुनौती दी जा सकती है।

महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता हसन मुश्रीफ और उनके तीन बेटों को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी राहत मिली है। PMLA की विशेष अदालत ने ईडी की क्लोजर रिपोर्ट मान ली है, यानी इस मामले की फाइल अब बंद हो गई है। केस 2022 में दर्ज हुआ था।

विशेष जज एस. वी. सहारे ने यह आदेश मंगलवार को दिया था, लेकिन इसकी खबर गुरुवार को बाहर आई। जज ने साफ लिखा कि "In view of the fact that the predicate offence has been quashed, the offence under the PMLA does not survive"। सीधी बात यह कि जब असली यानी मूल अपराध ही रद्द हो चुका है, तो उसके सहारे खड़ा PMLA का मामला टिक नहीं सकता। अदालत ने 4 अप्रैल 2022 की ECIR भी खत्म कर दी और केस के कागजात ईडी अधिकारियों को वापस देने को कहा।

क्लोजर रिपोर्ट मांगते वक्त ईडी ने अदालत को बताया था कि PMLA के तहत कार्रवाई तभी चल सकती है, जब कोई शेड्यूल्ड अपराध मौजूद हो। इसे उसने 'sine qua non' यानी अनिवार्य शर्त कहा। ईडी का कहना था कि हाई कोर्ट के आदेशों के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत में कुछ बचा ही नहीं है।

फैसले के बाद मुश्रीफ ने कहा, "मेरी दिवाली मीठी हो गई"।

मामला कोल्हापुर की सर सेनापति संताजी घोरपड़े शुगर फैक्टरी से जुड़ा है। जांच की शुरुआत पुणे के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज की मार्च 2022 की एक शिकायत से हुई थी, जिसमें कंपनी कानून तोड़ने की बात थी। फरवरी 2023 में कोल्हापुर के मुरगुड पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई। आरोप था कि किसानों से शेयर पूंजी के नाम पर पैसा जुटाया गया और उसमें गड़बड़ी हुई। मुश्रीफ और उनके बेटों के साथ फैक्टरी और उसके डायरेक्टर भी आरोपी बनाए गए थे। चर्चा यह भी रही कि किसानों को फैक्टरी का शेयरधारक बनाने का वादा करके रकम ली गई और करीब 40 हजार किसानों के साथ धोखा हुआ। ईडी का आरोप था कि यह पैसा मुश्रीफ की कंपनियों की तरफ मोड़ा गया।

ईडी के मुताबिक 2013-2014 में फैक्टरी को कई शेल कंपनियों से करोड़ों रुपये आए, जिनमें कोलकाता की कंपनियां और रजिस्टर से हटाई जा चुकी कंपनियां भी थीं। यह पैसा इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर की सदस्यता बताकर लाया गया। एजेंसी का कहना था कि फैक्टरी के वित्तीय विवरण में 11.35 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश दिखाया गया, पर उसके पीछे बैंक का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। उसके अनुसार रकम कई परतों में, घुमा-फिराकर और नकद जमा के रास्ते फैक्टरी, उससे जुड़ी LLP और डायरेक्टरों के खातों तक पहुंचाई गई।

ईडी ने 2023 की शुरुआत में कई ठिकानों पर तलाशी ली। जुलाई 2024 में उसने 2.07 करोड़ रुपये की FD रसीदें और 7.70 लाख रुपये नकद अस्थायी तौर पर कुर्क किए। दिसंबर 2024 में नई दिल्ली की एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी ने इस कुर्की को सही ठहराया।

इसके बाद आरोपी दोनों मूल मामलों को चुनौती देने बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचे। जून 2025 में हाई कोर्ट ने मुरगुड पुलिस की FIR रद्द कराने वाली याचिका निपटा दी, क्योंकि जांच अधिकारी स्थानीय अदालत में पहले ही 'C-Summary' रिपोर्ट दे चुके थे और अदालत उसे मंजूर भी कर चुकी थी। C-Summary का मतलब है कि मामला न सच निकला, न झूठ। पिछले साल 6 नवंबर को हाई कोर्ट ने RoC की शिकायत पर पुणे की अदालत की जारी की हुई प्रक्रिया भी रद्द कर दी। उसने कहा कि आरोप 2013-14 के हैं, जबकि कंपनी कानून का जो संशोधन अप्रैल 2021 में आया, वह आगे के लिए लागू होता है और पीछे की तारीख से नहीं चल सकता।

अब इस राहत के बाद वरिष्ठ वकील असीम सरोदे ने ट्वीट करके नई बहस छेड़ दी है। उनका कहना है कि कथित 100 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच बंद होने से बात खत्म नहीं होती। उनके मुताबिक क्लोजर रिपोर्ट मंजूर करने वाले फैसले को चुनौती दी जा सकती है। सरोदे ने कहा कि समाज के प्रति संवेदनशील कोई भी नागरिक इसे कानूनी चुनौती दे सकता है, और कांग्रेस, शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता भी ऐसा कर सकते हैं। उनका दावा है कि कई लोग अदालत जाने की तैयारी में हैं, पर पूरा फैसला पढ़ने के बाद ही आगे का कदम तय होगा। इस बयान के बाद माना जा रहा है कि मुश्रीफ की मुश्किलें फिर बढ़ सकती हैं।

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