मोदी का शरद पवार को फोन, संजय राउत की पहली प्रतिक्रिया; बोले, प्रधानमंत्री कितने भी...
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शरद पवार की तबीयत बिगड़ने पर प्रधानमंत्री मोदी के फोन के बाद ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने मोदी पर बीमारी में भी राजनीति करने और भ्रम पैदा करने का आरोप लगाया।
वरिष्ठ नेता शरद पवार की तबीयत बिगड़ने से वे पुणे के रुबी अस्पताल में इलाज करा रहे थे। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन करके हालचाल पूछा। मोदी ने पवार से कहा कि आप अपनी सेहत का ख्याल रखिए, सुप्रिया और हम देश संभाल लेंगे, फिक्र मत कीजिए। हमें आशीर्वाद देने के लिए आप पूरी तरह ठीक हो जाइए।
इससे राजनीतिक गलियारों में फिर चर्चा तेज हो गई है कि क्या पवार एनडीए के साथ जाएंगे। इस पर ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि मोदी बीमारी में भी राजनीति करते हैं और भ्रम पैदा करने का काम करते हैं।
राउत ने कहा, "नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री हैं, पर वे एक झूठे आदमी हैं। उन्होंने शरद पवार को फोन किया। लालू यादव भी बीमार हैं। लालू यादव बड़े नेता हैं और शरद पवार भी बड़े नेता हैं। फिर लालू यादव को फोन क्यों नहीं करते? ऐसा है तो प्रधानमंत्री को देश के सभी प्रमुख नेताओं का हाल पूछना चाहिए।" उनके मुताबिक मोदी अपनी सुविधा की बीमारी का हाल पूछते हैं और सुप्रिया सुले का नाम लेकर भ्रम पैदा करते हैं। जो बीमारी का हाल पूछने में भी राजनीति करे, उसके बारे में क्या बोलें। राउत ने कहा कि मोदी कितने भी पासे फेंक लें, शरद पवार और उनकी पार्टी मोदी के बहकावे में नहीं आएगी।
राउत ने दावा किया कि दुनिया भर में सत्ता बदलने की हवा चल रही है और इसी पृष्ठभूमि में मोदी अप्रैल में पद छोड़ देंगे। उन्होंने कहा, "मोदी अप्रैल या मई में चले जाएंगे। मैं यह छह महीने पहले से कह रहा हूं। देवेंद्र फडणवीस भी जाने वाले हैं।" उनका दावा है कि मोदी और शाह के खिलाफ उनके अपने ही लोग खड़े होंगे।
अमेरिका के चुनाव पर राउत ने कहा कि ट्रंप और मोदी में समानता है और ट्रंप, मोदी और नेतन्याहू की तिकड़ी है। अमेरिका युद्ध में क्यों उतरा, इसका जवाब जनता ढूंढ रही है। जनता ने नफरत की राजनीति को नकार दिया है, सभी धर्मों के लोगों की जीत हुई है और हद से ज्यादा धर्मांधता कहीं नहीं चलती।
गोकुल पर चार निदेशक नियुक्त किए जाने पर राउत ने इसे सरकार की मस्ती बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बहुमत को किनारे कर, हारे हुए लोगों के हाथ में गोकुल देकर उसे गुजरात लॉबी को बेचना है। इन्हें लोकतंत्र की परवाह नहीं है। जनभावना दबाकर अपनी सत्ता लाने के लिए चार निदेशक बिठाने को ही चर्बी कहते हैं। लोकतांत्रिक तरीके से आया पैनल क्या इन्हें मंजूर नहीं है?
राउत ने कहा कि लोग सड़कों पर उतरेंगे। साढ़े पांच लाख किसानों का फैसला नहीं मानेंगे तो क्या करेंगे, हार तो माननी ही पड़ेगी। गोकुल को बचाने के लिए महाविकास अघाड़ी को एक साथ आना चाहिए। फडणवीस को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी और अमित शाह की दादागिरी को तोड़ना चाहिए।
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