शुक्रवार, 6 नवंबर 2026

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दादा के निधन के बाद विलय पर झूठ क्यों बोला? रोहित पवार का तटकरे और पटेल से सवाल

दादा के निधन के बाद विलय पर झूठ क्यों बोला? रोहित पवार का तटकरे और पटेल से सवाल तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
सियासत PT24 राजनीति डेस्क

सुनील तटकरे के दावे के बाद रोहित पवार ने पूछा कि अजित पवार के निधन के बाद दोनों राष्ट्रवादी के विलय की बात से इनकार क्यों किया गया था।

मुंबई: वरिष्ठ नेता शरद पवार की तबीयत का हालचाल जानने के लिए प्रफुल पटेल ने उनसे मुलाकात की। इसके बाद एक बार फिर दोनों राष्ट्रवादी पार्टियों के विलय की चर्चा शुरू हो गई है। इसी चर्चा के बीच राष्ट्रवादी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने कहा कि अजितदादा के रहते दोनों राष्ट्रवादी के विलय की बातचीत चल रही थी और अगर वे आज होते तो दोनों पार्टियां साथ दिखतीं।

तटकरे का दावा था कि अजितदादा पवार के जीवित रहते यह बातचीत आखिरी दौर में थी। उनके मुताबिक दादा आज हमारे बीच होते तो 12 फरवरी के मुहूर्त पर दोनों राष्ट्रवादी एक साथ नजर आतीं। इस दावे पर राष्ट्रवादी शरद पवार गुट के विधायक रोहित पवार ने प्रतिक्रिया दी है।

रोहित पवार ने तटकरे और प्रफुल पटेल के बदले हुए रुख पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "अजितदादा के रहते दोनों राष्ट्रवादी का विलय होने वाला था, यह हम पहले से ही कह रहे थे। लेकिन दादा का दुर्भाग्यपूर्ण निधन होने के फौरन बाद सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल ने मीडिया के सामने साफ इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि विलय को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी और दादा के मन में ऐसा कुछ नहीं था।"

रोहित पवार ने आगे पूछा, "फिर अब अचानक ऐसा क्या हुआ कि वे दोबारा मान रहे हैं कि विलय की चर्चा हुई थी? दादा के निधन के बाद उन्होंने यह हकीकत क्यों छिपाई और झूठ क्यों बोला?" उन्होंने यह सीधा सवाल तटकरे और पटेल से किया है।

तटकरे और पटेल की मौजूदा स्थिति पर भी रोहित पवार ने अपनी बात रखी। उनके शब्दों में, "अजितदादा की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अंदरूनी खेमे में इस वक्त सुनील तटकरे और प्रफुल पटेल बड़ी मुश्किल में आ गए होंगे, ऐसी संभावना है। पार्टी में उनकी अब कितनी चलती है, इस पर शक है। अपनी ही पार्टी में मुश्किल में आने की वजह से उन्होंने अपना राजनीतिक रुख बदला होगा।"

भाजपा और सत्ता में शामिल होने की चर्चाओं पर भी रोहित पवार ने अपना रुख साफ किया। उन्होंने कहा, "हम पवार साहब को बहुत करीब से जानते हैं। आज भाजपा की नीतियों की वजह से देश के युवा, महिलाएं और किसान संकट में हैं और संविधान खतरे में आ गया है। हम लगातार भाजपा की अन्यायकारी नीतियों के खिलाफ लड़ रहे हैं। इसलिए सत्ताधारियों के साथ जाने या भाजपा के साथ सहयोग करने का सवाल ही पैदा नहीं होता, और पवार साहब ऐसा कोई फैसला नहीं लेंगे।"

इस तरह एक तरफ तटकरे का दावा है कि दादा के रहते विलय तय होने के करीब था। दूसरी तरफ रोहित पवार का कहना है कि निधन के बाद तटकरे और पटेल ने खुद इस चर्चा से इनकार किया था, और अब वे अपना रुख क्यों बदल रहे हैं, इसका जवाब उन्हें देना चाहिए।

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