तटकरे के विलय वाले बयान के पीछे विधान परिषद की हार, शाह से मुलाकात और मोदी का फोन
अजित पवार गुट की एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने दोनों एनसीपी के विलय की बैठकों की बात कही है। पिछले आठ दिन की चार घटनाओं से इसे जोड़कर देखा जा रहा है।
अजित दादा गुट की एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे ने आज एक नया बयान देकर राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। तटकरे का कहना है कि दोनों एनसीपी के विलय को लेकर बैठकें हुई थीं और अजित पवार ने उन्हें इसकी जानकारी दी थी। इसके बाद दोनों एनसीपी के साथ आने की चर्चा तेज हो गई है।
कहा जा रहा है कि तटकरे ने यह मुद्दा सोच-समझकर सही वक्त पर उठाया है। इसकी वजह पिछले आठ दिन में पार्टी में हुई चार घटनाएं बताई जा रही हैं: विधान परिषद की हार, दो राजनीतिक मुलाकातें और एक सबसे बड़े नेता का फोन।
पहली घटना विधान परिषद के चुनाव की है। राज्य में हुए इस चुनाव में अजित दादा गुट को करारी हार मिली, जबकि शरद पवार गुट को 100 फीसदी कामयाबी मिली। इससे यह बात सामने आती है कि शरद पवार के गुट पर लोगों का भरोसा है, और अजित दादा गुट में नेतृत्व की कमी भी खुलकर दिख गई। अजित पवार के निधन के बाद पार्टी को मजबूती से आगे ले जाने वाला और राजनीतिक रणनीति में माहिर नेता एनसीपी में नहीं बचा है, यह बात भी उभरी है। चुनाव के बाद प्रफुल्ल पटेल ने ट्वीट करके नेतृत्व पर ही सवाल उठाया था। सूत्रों के मुताबिक अजित दादा गुट के नेताओं को लगता है कि अगले चुनाव में सक्षम नेतृत्व के बिना पार्टी के अच्छे दिन नहीं आएंगे और पार्टी को बिखरने में वक्त नहीं लगेगा।
दूसरी घटना केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात की है। पिछले हफ्ते एनसीपी के बड़े नेता शाह से मिले थे। सूत्रों ने बताया कि इन नेताओं ने शाह को भरोसा दिलाया कि उनसे बात किए बिना विलय पर कोई चर्चा नहीं करेंगे। सूत्रों के मुताबिक नेताओं ने पार्थ पवार के पार्टी में बढ़ते दखल की शिकायत भी शाह से की। खास बात यह है कि सुनेत्रा पवार को अंधेरे में रखकर प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबळ, हसन मुश्रीफ, दिलीप वळसे पाटील, धनंजय मुंडे और समीर भुजबळ ने शाह से मुलाकात की थी। इससे साफ हुआ कि एनसीपी में सब कुछ ठीक नहीं है। इसके फौरन बाद तटकरे ने विलय पर बयान दिया, इसलिए इस बयान को शाह की मुलाकात से जोड़कर देखा जा रहा है।
तीसरी घटना एक फोन की है। शरद पवार पुणे के रुबी अस्पताल में इलाज करा रहे थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। मोदी ने पवार की तबीयत का हाल पूछा और ख्याल रखने की सलाह दी। मोदी ने पवार से कहा, "सुप्रिया ताई और हम देश संभालते हैं। आप चिंता मत कीजिए। हमें आशीर्वाद देने के लिए आप पूरी तरह ठीक हो जाइए।" मोदी के इस बयान के कई मतलब निकाले जा रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं कि क्या पवार एनडीए के साथ जाएंगे, और उससे पहले क्या एनसीपी का विलय होगा।
चौथी घटना पटेल और पवार की मुलाकात है। पवार मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती हुए। कल प्रफुल्ल पटेल उनसे मिले और करीब एक घंटा बात की। पवार ने पटेल से कहा कि 10 तारीख को मिलेंगे। इससे फिर चर्चा छिड़ गई है कि 10 तारीख को क्या होने वाला है। सवाल यह भी है कि पटेल दूसरी पार्टी में हैं और पवार खुद बीमार हैं, फिर दोनों के बीच किस विषय पर बात हुई, क्या विलय पर बात हुई और क्या विलय का फॉर्मूला तय हुआ। पटेल की मुलाकात के बाद ही तटकरे ने विलय पर बयान दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ये संकेत क्या हैं और आगे क्या होगा, यह 10 तारीख के बाद ही साफ होगा।
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