शरद पवार एनडीए के साथ जाएंगे? संजय राऊत ने एक वाक्य में दिया जवाब
शरद पवार के एनडीए के साथ जाने की चर्चा पर ठाकरे गुट के नेता संजय राऊत ने कहा कि पवार कहीं नहीं जाएंगे, वे हमारे साथ ही रहेंगे।
वरिष्ठ नेता शरद पवार अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। उनकी तबीयत का हालचाल जानने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें फोन किया था। मोदी ने पवार को आराम करने की सलाह दी और कहा कि सुप्रिया सुळे और हम देश संभाल लेंगे। इसके फौरन बाद राष्ट्रवादी के नेता प्रफुल्ल पटेल ने पवार से मुलाकात करके हालचाल पूछा। दोनों नेताओं के बीच डेढ़ घंटे बातचीत हुई।
इससे राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की अफवाहें उड़ने लगी हैं और पवार के एनडीए के साथ जाने की चर्चा फिर जोर पकड़ गई है। इस पर ठाकरे गुट के नेता संजय राऊत ने मीडिया से बात करते हुए एक वाक्य में जवाब दिया कि शरद पवार कहीं नहीं जाएंगे और हमारे साथ ही रहेंगे।
राऊत ने कहा, "शरद पवार कहीं नहीं जाएंगे। मैं यकीन के साथ कहता हूं। प्रफुल्ल पटेल को जो कहना है कहने दीजिए। पवार कहीं नहीं जाएंगे। वे हमारे साथ ही रहेंगे। उन्होंने प्रगतिशील महाराष्ट्र की अगुवाई की है। कोई डींग मार रहा है तो वह झूठ है। वे हमारे साथ रहेंगे और हमें आशीर्वाद देते रहेंगे।"
ईडी ने राष्ट्रवादी के नेता हसन मुश्रीफ को क्लीन चिट दी है। इस पर राऊत ने कहा कि अब किरीट सोमय्या को अटल सेतु से छलांग लगा देनी चाहिए। उनके मुताबिक फडणवीस ने सोमय्या का मुंह तोड़ दिया है। सोमय्या को हसन मुश्रीफ के दरवाजे पर और ईडी के दरवाजे पर अनशन पर बैठना चाहिए। राऊत ने कहा कि जिन-जिन के खिलाफ ईडी के केस हुए और आंदोलन किए गए, वे सब भाजपा में चले गए हैं और भाजपा ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है। अब सोमय्या के सामने एक ही काम बचा है कि वे इन नेताओं के दरवाजे पर जाकर अनशन करें।
राऊत ने कहा कि उन्होंने सोमय्या की तस्वीर देखी है, उनका चेहरा काला पड़ गया है और दांत गिर गए हैं। भाजपा अब हसन मुश्रीफ की तस्वीर लगाए और हसन मुश्रीफ के नाम का एक मेडल सोमय्या के सीने पर लगा दे।
गोकुल के मुद्दे पर भी राऊत ने सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि गोकुल की बैठक के लिए 14 का कोरम चाहिए, लेकिन लोगों ने अपना फैसला दे दिया है। वह कोरम पूरा न हो, इसलिए फडणवीस ने समान विचारधारा वाले पैनल की दो सीटें चुरा ली हैं। आखिरी वक्त में पांच-छह वोटों से फैसले पलट दिए गए। उन्होंने सवाल किया कि अगर महाडिक के पैनल को 13 सीटें और सतेज पाटिल को 12 सीटें मिलतीं, तो क्या यह फैसला लिया जाता? क्या फडणवीस पांच सदस्य नियुक्त करने का फैसला तब करते? तब फडणवीस कहते कि बहुमत है। राऊत ने कहा कि अब आप हार गए हैं, आपका पैनल हार गया है, लोगों ने आपको हराया है, फिर भी आप उन्हें सरकारी सदस्य के तौर पर ले रहे हैं, यह क्या तरीका है। फडणवीस अपनी छवि को और दागदार न होने दें। उनकी छवि बहुत दागदार हो चुकी है, इसे इतना काला न करें कि लोग आपको पहचान ही न पाएं।
राऊत ने कहा कि अगर लोकतंत्र और जनमत की परवाह होगी, तो राज्यपाल उस अध्यादेश पर दस्तखत नहीं करेंगे। उनके मुताबिक मौजूदा हुक्मरानों ने शर्म और लाज की कोई फिक्र किए बिना जनमत का फैसला ठुकरा दिया है। इसीलिए हम कहते हैं कि लोकतंत्र खतरे में है। उन्हें अंदाजा नहीं था कि फडणवीस इतने नीचे स्तर तक जाएंगे। चंद्रकांत पाटिल की बात समझ में आती है, लेकिन फडणवीस दावा करते हैं कि उनके पिता ने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष में हिस्सा लिया था। राऊत ने कहा कि अब उन्हें इसी पर शक होने लगा है। अगर गंगाधर फडणवीस लोकतंत्र और आजादी के लिए लड़ रहे थे, तो उनके बेटे फडणवीस लोकतंत्र के दिए फैसले को कुचल नहीं सकते। राऊत के मुताबिक यह उनके पिता के संघर्ष और त्याग का अपमान होगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।