मनोज जरांगे पाटिल की ऑडियो क्लिप की जांच के लिए मुंबई पुलिस ने बनाई SIT
मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने सोमवार को आदेश जारी कर विशेष जांच दल गठित किया।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मराठा आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले मनोज जरांगे पाटिल ने 22 अक्टूबर को छत्रपति संभाजीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। वहां उन्होंने एक ऑडियो क्लिप जारी की थी। अब मुंबई पुलिस ने इसकी गहराई से और निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT बनाई है।
मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती ने सोमवार को इसका आदेश जारी किया। आदेश के मुताबिक क्लिप में कई लोगों का जिक्र है और कुछ रकम के लेन-देन की बात भी की गई है।
SIT का गठन महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर हुआ है। इसका काम क्लिप की फोरेंसिक जांच करना, उससे जुड़ी दूसरी तकनीकी जांचें करना और पूरे मामले को बारीकी से और निष्पक्ष तरीके से खंगालना है।
टीम की कमान मुंबई के साउथ रीजन के एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेश बलकवडे के हाथ में होगी। साउथ रीजन-III के डिप्टी कमिश्नर विजयकांत सागर और मुंबई क्राइम ब्रांच की साइबर यूनिट के डिप्टी कमिश्नर बजरंग बनसोडे टीम के सदस्य होंगे। आदेश में कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर टीम प्रमुख जांच के लिए और अफसर भी लगा सकते हैं, और जांच कहां तक पहुंची, इसकी जानकारी समय-समय पर अधिकारियों को देते रहेंगे।
इन रिकॉर्डिंग्स की वजह से महाराष्ट्र की राजनीति में विवाद खड़ा हो गया है। मामला 500 करोड़ रुपये के लेन-देन के आरोपों का है। कथित बातचीत में दावा किया गया है कि यह रकम शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे पाटिल तक पहुंचाई गई। ये आरोप साबित नहीं हुए हैं और रिकॉर्डिंग्स की जांच जांच के हिस्से के तौर पर की जाएगी।
SIT देखेगी कि रिकॉर्डिंग्स असली हैं या नहीं, वे कहां से आईं और बातचीत में किन लोगों की आवाजें हैं। जांच की मांग शिवसेना और भाजपा के नेताओं ने की थी। खुद जरांगे पाटिल ने भी यही मांग रखी है। उन्होंने सरकार से कहा है कि जांच बिना किसी राजनीतिक दखल के आजादी से चले, और उन्होंने जांच में सहयोग करने की बात भी कही है।
शिवसेना के वरिष्ठ नेता रामदास कदम ने आरोप लगाया है कि कुछ नेता मिलकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को राजनीतिक तौर पर निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि कुछ नेताओं को ऑडियो क्लिप सामने आने से पहले ही उनके बारे में कैसे पता था। कदम ने यह भी पूछा कि क्या भाजपा के भीतर कुछ लोग शिंदे को हाशिये पर धकेलना चाहते हैं, और मांग की कि साफ किया जाए कि सत्ताधारी गठबंधन में कौन उनके खिलाफ काम कर रहा है।
कदम ने भाजपा नेता प्रसाद लाड की जरांगे पाटिल के साथ खाना खाते हुए कथित तस्वीरें भी शेयर कीं। उनका कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को चिट्ठी लिखकर इस मामले की उच्च स्तरीय जांच मांगी है।
राज्य के उद्योग मंत्री और शिवसेना नेता उदय सामंत ने कोल्हापुर में कदम की बात दोहराई। उनका आरोप है कि बातचीत में भाजपा से जुड़े लोग शामिल थे। उनके मुताबिक रिकॉर्डिंग शिंदे को बदनाम करने की साजिश का हिस्सा है। सामंत ने कहा कि शिंदे ने मराठा आरक्षण का मुद्दा संवेदनशीलता से संभाला और समाज की मांगों का साथ दिया।
भाजपा ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने चेतावनी दी कि पार्टी कदम के बेबुनियाद आरोप बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने कहा, "हम सत्ताधारी गठबंधन के साझेदार हैं। सरकार में रहकर लगातार अपने ही सहयोगी पर हमला करना महाराष्ट्र की राजनीतिक संस्कृति को शोभा नहीं देता।" दरेकर ने पूछा कि भाजपा शिंदे को कमजोर क्यों करना चाहेगी, जबकि पिछले चुनावों के बाद पार्टी ने मुख्यमंत्री पद के लिए उनका समर्थन किया था। भाजपा के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड ने भी कदम को ऐसे बयानों से बचने की सलाह दी जिनसे महायुति गठबंधन में दरार पड़ सकती है।
फडणवीस ने सवाल किया कि दो साल से ज्यादा पुरानी बताई जा रही बातचीत ठीक इसी वक्त क्यों सामने आई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच में रिकॉर्डिंग्स और उनसे जुड़े लोगों की सच्चाई सामने आ जाएगी।
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