जरांगे के 500 करोड़ वाले आरोप पर शिंदे का जवाब, बोले- सबूत दीजिए, जांच होगी
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मनोज जरांगे पाटील के 500 करोड़ रुपये वाले आरोप को खारिज किया और कहा कि सबूत हों तो दें, जांच होनी चाहिए।
मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने बीड के दशहरा मेले में उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे पर गंभीर आरोप लगाए थे। अब शिंदे ने इन आरोपों पर पहली बार अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने न किसी को 500 करोड़ रुपये दिए हैं और न किसी से लिए हैं।
मामला यह है कि भाजपा में चर्चा है कि एकनाथ शिंदे ने अपने बेटे श्रीकांत शिंदे के जरिए जरांगे को 500 करोड़ रुपये दिए। जरांगे पाटील ने चुनौती दी थी कि शिंदे इस बारे में दशहरा मेले से जवाब दें। लेकिन शिंदे ने दशहरा मेले में इस पर कुछ नहीं कहा।
दशहरा मेले में शिंदे की शिवसेना के बड़े नेताओं ने जरांगे पाटील को निशाने पर लिया। इनमें रामदास कदम सबसे आगे थे। कदम ने जरांगे की औकात की बात करते हुए सख्त चेतावनी दी कि वे दोबारा एकनाथ शिंदे के खिलाफ न बोलें।
इसके बाद जरांगे पाटील ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि अब वे सबूत देंगे। उनका कहना था कि उन्होंने तो बस एक सीधे सवाल का जवाब मांगा था, लेकिन सामने वाले चिढ़ रहे हैं और बौखला गए हैं। जरांगे ने कहा कि तुमने मुझे 500 करोड़ रुपये दिए या नहीं, इस पर हां या ना कह दो। उन्होंने कहा कि वे इंतजार कर रहे हैं कि शिंदे साहब क्या बोलते हैं, और थोड़े दिनों में पता चल जाएगा कि बोलने से पहले सोचना चाहिए था।
शिंदे नासिक के सिंहस्थ कुंभमेले का न्योता राष्ट्रपति को देने के लिए आज दिल्ली में थे। वहीं पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने जरांगे के आरोप पर प्रतिक्रिया दी। शिंदे ने कहा कि हमारे सारे प्रवक्ता इस पर बोल रहे हैं, मैंने किसी को 500 करोड़ न दिए हैं, न लिए हैं। उन्होंने कहा कि जरांगे पाटील को पहले पता कर लेना चाहिए, फिर बोलना चाहिए।
शिंदे ने यह भी कहा कि जरांगे पाटील के पास अगर कोई सबूत हैं तो वे दें। उनकी जांच होनी चाहिए, फिर दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
शिंदे ने मराठा समाज के लिए अपने काम भी गिनाए। उनके मुताबिक जब जरांगे पाटील मराठा समाज का काम कर रहे थे, तब उन्होंने भी अलग-अलग कामों के जरिए समाज को न्याय देने का काम किया। शिंदे ने कहा कि पिछले 60 साल में जो नहीं हुआ, वह उन्होंने किया, और आज भी मराठा समाज का आरक्षण टिका हुआ है। उन्होंने कहा कि मनोज जरांगे मराठा समाज का ही काम कर रहे थे, इसलिए उन्होंने उन्हें मदद दी। साथ ही शिंदे ने कहा कि जरांगे राजनीतिक प्लेटफॉर्म न बनाएं।
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