तेलंगाना के तुमिदिहट्टी प्रोजेक्ट की जांच के लिए फडणवीस ने दिया संयुक्त अध्ययन का आदेश
महाराष्ट्र तुमिदिहट्टी प्रोजेक्ट की ऊंचाई बढ़ाने के प्रस्ताव और डूब के असर का अलग से अध्ययन करेगा।
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महाराष्ट्र अब तेलंगाना के तुमिदिहट्टी सिंचाई प्रोजेक्ट से जुड़े मुद्दों का अपने स्तर पर अलग से अध्ययन करेगा। इसमें प्रोजेक्ट की ऊंचाई बढ़ाने का प्रस्ताव भी शामिल है। यह फैसला तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की गुजारिश के बाद लिया गया है।
मुंबई के सह्याद्री गेस्ट हाउस में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और उनके प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। बैठक में रेवंत रेड्डी और तेलंगाना के जल संसाधन मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी ने फडणवीस को तुमिदिहट्टी प्रोजेक्ट की जानकारी दी। उन्होंने प्रोजेक्ट की ऊंचाई 148 मीटर से बढ़ाकर 152 मीटर करने की मंजूरी भी मांगी।
फडणवीस ने कहा कि पड़ोसी राज्यों के बीच के मसले आपसी सहयोग से सुलझें, महाराष्ट्र ने हमेशा इसी का साथ दिया है। उनके मुताबिक अगर किसी दूसरे राज्य को फायदा होता हो और महाराष्ट्र के नागरिकों को कोई नुकसान न हो, तो सकारात्मक फैसला लेने में राज्य को कोई ऐतराज नहीं होगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र नागरिकों के हितों की हिफाजत करते हुए तेलंगाना के साथ सहयोग का रचनात्मक रुख अपनाएगा।
फडणवीस ने बताया कि तेलंगाना के प्रस्ताव पर महाराष्ट्र पहले सकारात्मक रुख अपना चुका था। लेकिन बाद में हुए निरीक्षण से पता चला कि पिछली मंजूरी के बाद डूब का असली इलाका शुरुआती अंदाजे से बड़ा निकला। इसलिए नए प्रस्ताव के असर का बारीकी से आकलन जरूरी है।
दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों और जल संसाधन विभाग के सचिवों की एक संयुक्त समिति बनेगी। यह समिति तकनीकी पहलुओं और महाराष्ट्र के इलाकों के डूबने की संभावना की जांच करेगी। फडणवीस के मुताबिक अध्ययन में यह देखा जाएगा कि प्रोजेक्ट की जगह में बदलाव से डूब का इलाका कैसे प्रभावित होगा। साथ ही संबंधित वन्यजीव अभयारण्य का शामिल होना और नदी के पाट के बाहर कितनी जमीन लगेगी, यह भी परखा जाएगा।
अगर तेलंगाना को महाराष्ट्र के आकलन में कोई आपत्ति या कमी दिखे, तो दोनों राज्यों के अधिकारी उस पर बातचीत करेंगे। जरूरत पड़ी तो विशेषज्ञों की राय भी ली जाएगी। फडणवीस ने यह भी कहा कि पानी के बंटवारे और कानूनी मंजूरियों के मामले केंद्रीय जल आयोग के दायरे में आते हैं। आयोग जब महाराष्ट्र से राय मांगेगा, तब राज्य तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखेगा। प्रोजेक्ट पर आखिरी फैसला स्वतंत्र आकलन और तकनीकी चर्चा के बाद ही होगा।
बैठक में महाराष्ट्र के जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन वर्चुअली जुड़े, जबकि तेलंगाना के जल संसाधन मंत्री उत्तम कुमार रेड्डी खुद मौजूद थे। महाराष्ट्र के मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, तेलंगाना के मुख्य सचिव संजय जाजू, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी, जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव एकनाथ डवले, सचिव जयंत बोरकर और प्रकाश मिसाल समेत संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी बैठक में हाजिर थे।
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