शिंदे ने रामदास कदम से कहा, जरांगे पाटील के मुद्दे पर अब कुछ न बोलें
महायुति में बढ़े तनाव के बीच उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेता रामदास कदम को इस विषय पर चुप रहने की सूचना दी है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
मुंबई : उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शिवसेना नेता रामदास कदम को सूचना दी है कि वे मनोज जरांगे पाटील के मामले पर अब कुछ न बोलें। इसकी जानकारी सामने आई है। मराठा आंदोलक मनोज जरांगे पाटील ने 500 करोड़ के लेन-देन की ऑडियो क्लिप सुनाई थी। उसके बाद से राजनीतिक गलियारों में हलचल मची हुई है और महायुति के अंदर भी तनाव का माहौल बन गया है।
इसी बीच रामदास कदम ने पत्रकार परिषद बुलाकर सीधे भाजपा नेताओं पर आरोप लगा दिए। उन्होंने विधायक प्रसाद लाड और मनोज जरांगे पाटील की तस्वीर दिखाते हुए कहा कि दोनों की दोस्ती है। कदम ने यह भी कहा था कि भाजपा की तरफ से सहयोगी पार्टी को दबाया जा रहा है। इससे भाजपा के नेता भी नाराज हो गए हैं।
क्लिप सामने आने के बाद भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। मंत्री उदय सामंत ने दोनों तरफ तालमेल बिठाने की कोशिश की। फिर भी मामले को लेकर माहौल गरम है। ऐसे में बताया जा रहा है कि शिंदे ने कदम को इस विषय पर और टिप्पणी न करने की साफ सूचना दी है। कहा जा रहा है कि शिंदे का रुख यही है कि अब इस पर बोलना बंद किया जाए।
इसके चलते राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है कि क्या शिंदे इस विवाद को यहीं खत्म करना चाहते हैं। अब देखना यह होगा कि जरांगे पाटील की ऑडियो क्लिप के बाद भाजपा और शिंदे की शिवसेना के बीच चल रहे आरोप-प्रत्यारोप पर पर्दा गिरता है या नहीं।
क्या रामदास कदम पार्टी में अकेले पड़ गए हैं? जरांगे पाटील की क्लिप पर हुई टीका के बाद कदम भाजपा के निशाने पर हैं, लेकिन पार्टी के बाकी नेता उनके साथ खड़े नहीं दिख रहे। भाजपा विधायक प्रसाद लाड और प्रवीण दरेकर की आलोचना के बाद मंत्री उदय सामंत को छोड़कर शिवसेना के किसी नेता ने भाजपा विधायकों को जवाब नहीं दिया।
कदम ने मोदी को पत्र लिखकर सहयोगी पार्टी की तरफ से हो रही साजिश पर नाराजगी जताई है। उसके बाद पार्टी के नेताओं ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की और जरांगे पाटील की सुनाई क्लिप की जांच की मांग की। लेकिन कदम पर हो रही भाजपा विधायकों की टीका का कोई जवाब नहीं दे रहा। इससे साफ तस्वीर बनती है कि भाजपा से भिड़ने वाले कदम पार्टी में ही अकेले पड़ गए हैं।
शिवसेना के अंदर की खींचतान बढ़ने की चर्चा दबी जुबान में हो रही है। नेता निजी बातचीत में कहते हैं कि महायुति के नेताओं के बीच तालमेल सिर्फ नाम का है और असल में गठबंधन के नेताओं के बीच मान-अपमान की लड़ाई चल रही है। नेताओं के मुताबिक हाल में हुए विधानपरिषद के चुनाव इसका सबसे अच्छा उदाहरण हैं।
खबर छप चुकी है, लेकिन लाइव थ्रेड अभी शुरू नहीं हुआ। डेस्क कोई अपडेट डालते ही वह यहाँ दिखेगा।
कमेंट
अभी कोई कमेंट नहीं। पहले आप लिखिए।