यूरोप के सुपरमार्केट में फ्रिज पर साइबर हमले का शक, तापमान 50 डिग्री तक, खाना खराब
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
बेल्जियम, स्वीडन, लक्ज़मबर्ग, एस्टोनिया और आयरलैंड की कई दुकानों में कूलिंग सिस्टम गड़बड़ाया। हैकरों पर शक है, पर किसी ने जिम्मेदारी नहीं ली।
यूरोप के सुपरमार्केट में साइबर हमलों की एक नई लहर सामने आई है। इस बार निशाने पर बैंक खाते या मोबाइल नहीं, बल्कि दुकानों के फ्रिज और फ्रीजर हैं। शक है कि हैकरों ने इन्हें चलाने वाले कंट्रोल सिस्टम में दखल दिया।
इसकी वजह से बेल्जियम, स्वीडन, लक्ज़मबर्ग, एस्टोनिया और आयरलैंड की कई दुकानों में कूलिंग सिस्टम गड़बड़ा गया। कुछ जगहों पर फ्रिज का तापमान बढ़कर 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। नतीजा यह हुआ कि मांस, दूध से बनी चीजें और जमा हुआ खाना खराब हो गया। इस घटना से आज के सुपरमार्केट की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बेल्जियम में Delhaize, Carrefour और Spar चेन की कई दुकानें इसकी चपेट में आईं। Delhaize की कुछ दर्जन दुकानों में कूलिंग सिस्टम खराब हुआ। Carrefour की करीब 15 दुकानें प्रभावित हुई हैं, ऐसी खबर है।
स्वीडन में ICA और Coop चेन की दुकानों में भी फ्रिज का तापमान बढ़ गया। Coop की छह दुकानों में दिक्कत आई, यह जानकारी दी गई है। स्वीडन की कुछ दुकानों में फ्रिज और फ्रीजर का तापमान 50 डिग्री सेल्सियस तक गया, जिसके बाद खराब हो चुका खाना दुकानों से हटाना पड़ा।
आयरलैंड में SuperValu चेन की 13 दुकानों के खास तरह के कूलिंग सिस्टम पर साइबर घटना का असर पड़ा। एस्टोनिया में भी एक सुपरमार्केट के फ्रिज का तापमान बढ़ाकर 50 डिग्री तक कर दिया गया।
यह पहली बार नहीं है। अक्टूबर के महीने में फ्रांस के सैकड़ों सुपरमार्केट में इसी तरह का साइबर हमला हुआ था। उस वक्त हैकरों ने इंटरनेट से जुड़े कूलिंग सिस्टम पर कंट्रोल हासिल करके फ्रिज का तापमान बढ़ा दिया था, और बड़ी मात्रा में खाना खराब हो गया था। अब यूरोप के दूसरे देशों में भी वैसी ही घटनाएं होने से चिंता बढ़ गई है।
सुपरमार्केट में फ्रिज और फ्रीजर का तापमान संभालने के लिए इंटरनेट से जुड़े सिस्टम इस्तेमाल होते हैं। इन सिस्टम की सुरक्षा में जो कमियां हैं, उनका फायदा उठाकर हैकर दूर बैठे तापमान बदल सकते हैं। कुछ जगहों पर फ्रिज का डिफ्रॉस्ट सिस्टम चालू करके कूलिंग बंद कर दी गई, यह बात सामने आई है।
इन हमलों के पीछे कौन है, इसकी अब तक साफ जानकारी नहीं मिली है। किसी भी हैकर ग्रुप ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। इस घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि रोजमर्रा के इस्तेमाल के इंटरनेट से जुड़े सिस्टम भी साइबर हमलों का निशाना बन सकते हैं।
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