मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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टकर कार्लसन का दावा: 7 नवंबर को ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है अमेरिका

टकर कार्लसन का दावा: 7 नवंबर को ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है अमेरिका तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिकी पत्रकार टकर कार्लसन ने दावा किया है कि नेतन्याहू के दबाव में ट्रंप को 7 नवंबर तक परमाणु हथियार पर फैसला करना पड़ सकता है। इसका कोई सबूत सामने नहीं रखा गया है।

अमेरिका के जाने-माने पत्रकार टकर कार्लसन के एक दावे से पूरी दुनिया में हलचल मच गई है। कार्लसन का कहना है कि 7 नवंबर को अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है। मध्य पूर्व में खतरा एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है।

कार्लसन का आरोप है कि इजराइल के कार्यवाहक प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, डोनाल्ड ट्रंप पर ईरान के खिलाफ परमाणु हमले का दबाव बना रहे हैं। उनके मुताबिक अमेरिका के सामने ईरान के जमीन के नीचे बने यूरेनियम संवर्धन केंद्र को निशाना बनाने का विकल्प रखा गया है। कार्लसन ने यह भी कहा कि ट्रंप को 7 नवंबर तक परमाणु हथियार के इस्तेमाल पर फैसला लेना पड़ सकता है।

कार्लसन ने अपने सोशल मीडिया पर मध्य ईरान के पिकैक्स माउंटन नाम की भूमिगत जगह का जिक्र किया है। उनका कहना है कि इजराइली खुफिया एजेंसियों का दावा है कि ईरान ने इस इलाके में फिर से यूरेनियम संवर्धन शुरू कर दिया है। यह केंद्र जमीन के काफी नीचे है। अब तक अमेरिका और इजराइल ने उस पर भारी हमले किए, फिर भी वे वहां तक नहीं पहुंच पाए।

कार्लसन का दावा है कि इसकी वजह वहां की मजबूत ग्रेनाइट चट्टान है, जो केंद्र की हिफाजत करती है। उनके मुताबिक आम हथियारों से वहां पहुंचना मुश्किल है, इसलिए परमाणु हथियार ही अकेला रास्ता बचता है। लेकिन कार्लसन ने अपने दावे को सही ठहराने वाला कोई सबूत सार्वजनिक नहीं किया है। अमेरिका या इजराइल ने भी ऐसे किसी हमले की पुष्टि नहीं की है।

कार्लसन के दावे की पृष्ठभूमि में कुछ हालात भी गिनाए जा रहे हैं। इजराइल और अमेरिका ईरान पर पहले ही भारी हमले कर चुके हैं। फिर भी ईरान ने दोनों को कड़ी टक्कर दी और होर्मुज में उन्हें मात दी। ईरान का भी बहुत नुकसान हुआ, उसके अहम नेता, वैज्ञानिक और सैन्य कमांडर मारे गए। ईरान ने खाड़ी देश में मौजूद अमेरिका का एक सैन्य ठिकाना तबाह कर दिया। इस जंग में शामिल किसी भी देश को फायदा नहीं हुआ, नुकसान ही हुआ।

इसके बावजूद इजराइल के चुनाव में नेतन्याहू अकेले दम पर सत्ता हासिल नहीं कर सके। इजराइल में सरकार बनाने का पेंच अब भी फंसा हुआ है। इससे पहले नेतन्याहू ने इजराइली सेना प्रमुखों को ईरान पर हमला करने का आदेश दिया था, लेकिन उन्होंने उसे मानने से इनकार कर दिया।

उधर अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के लिए 3 नवंबर को वोटिंग होनी है। ट्रंप की गिरती साख और अमेरिका को बेवजह ईरान की जंग में घसीटने के गुस्से की वजह से जनता में नाराजगी है। चर्चा है कि इससे अमेरिकी कांग्रेस में ट्रंप को बड़ा झटका लग सकता है। इसी राजनीतिक हालत को देखते हुए कार्लसन का कहना है कि नेतन्याहू और ट्रंप दोनों को अपना बचाव करने के लिए अब एक जंग चाहिए। दुनिया भर के विश्लेषक भी पहले से कह रहे थे कि एक और बड़ी जंग हो सकती है।

ईरान की तैयारी को लेकर भी बातें हो रही हैं। कहा जा रहा है कि ईरान ने अपना 60 प्रतिशत यूरेनियम पहले ही नॉर्थ कोरिया को दे दिया है। दुनिया भर में यह शक भी जताया जाता है कि नॉर्थ कोरिया ईरान को परमाणु बम बनाने में मदद कर रहा है। ईरान के मौजूदा सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपनी पूरी फौज को पहले ही हुक्म दे रखा है कि ईरान पर हमला हो तो किसी आदेश का इंतजार किए बिना फौरन और सामने कोई भी हो, जैसे को तैसा जवाब दिया जाए।

चर्चा के मुताबिक अगर अमेरिका ने सचमुच ईरान पर परमाणु हमला किया, तो ईरान भी जोरदार पलटवार करने से पीछे नहीं हटेगा। ऐसे हमले के बाद की दुनिया और उसके राजनीतिक, सामाजिक समेत हर ढांचे के बारे में कहा गया है कि वह ऐसे छोर पर पहुंच जाएगा, जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की है।

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