मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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नेपाल में गांजे की नियंत्रित खेती का रास्ता खुल सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश

नेपाल में गांजे की नियंत्रित खेती का रास्ता खुल सकता है, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिए निर्देश तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक कारणों से गांजे की नियंत्रित खेती के लिए नियमावली बनाने को कहा है।

नेपाल में करीब पाँच दशक से बैन गांजे की खेती को फिर से कानूनी दायरे में लाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह औषधीय, वैज्ञानिक, कृषि, बागवानी और औद्योगिक कारणों से गांजे की नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए नियमावली तैयार करे। इसके लिए कोर्ट ने सरकार को तीन महीने की मियाद दी है। इससे नेपाल में कानूनी तरीके से गांजे की खेती और उत्पादन का रास्ता खुलने की संभावना बनी है।

नेपाल में 1976 में लागू हुए नार्कोटिक ड्रग्स (कंट्रोल) कानून के तहत गांजे की खेती, बिक्री और सेवन को अपराध माना गया था। अभी गांजे की खेती करने पर जेल और जुर्माने का प्रावधान है। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद औषधीय और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए नियंत्रित खेती की कानूनी व्यवस्था बनाने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 18 मई 2025 को दिया था। मगर इसका पूरा ब्योरा कुछ दिन पहले ही सार्वजनिक हुआ। पिछले साल 9 सितंबर को जेन-जी आंदोलन के दौरान सुप्रीम कोर्ट की इमारत में आग लग गई थी। इसी वजह से संबंधित कागजात मिलने में देर हुई।

कोर्ट ने साफ किया कि 1976 के कानून में गांजे पर पाबंदी जरूर है, फिर भी औषधीय, वैज्ञानिक और औद्योगिक कारणों से नियंत्रित खेती और उत्पादन के लिए कानूनी इंतजाम करने की गुंजाइश है। कोर्ट के मुताबिक सरकार ने जरूरी नियम और प्रक्रिया नहीं बनाई, इसलिए इस क्षेत्र का काम आगे नहीं बढ़ सका।

कोर्ट ने सरकार से कहा है कि वह गांजे की कमर्शियल खेती, उत्पादन, प्रोसेसिंग, स्टोरेज, इस्तेमाल, बिक्री, वितरण, निर्यात और आयात के लिए लाइसेंस देने की व्यवस्था बनाए। पूरी प्रक्रिया पर कड़ी निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

नियंत्रित खेती की इजाजत देते वक्त गैरकानूनी खेती, उत्पादन, बिक्री और वितरण को रोकने के लिए अलग रेगुलेटरी व्यवस्था बनाई जाए, ऐसा कोर्ट ने कहा है। यानी कोई भी अपनी मर्जी से गांजा नहीं उगा सकेगा। इसके लिए तय नियम, मानक और लाइसेंस की प्रक्रिया पूरी करनी होगी।

नेपाल में गांजे के औषधीय और वैज्ञानिक इस्तेमाल को इजाजत देने की मांग पिछले कुछ सालों से उठ रही है। मार्च 2020 में तत्कालीन प्रतिनिधि सभा सदस्य शेर बहादुर तामांग ने इस बारे में एक प्राइवेट बिल पेश किया था। इसमें औषधीय इस्तेमाल और निर्यात के लिए गांजे को कानूनी मान्यता देने की मांग की गई थी। इस प्रस्ताव के मुताबिक लाइसेंस वाले किसान गांजे की खेती और बिक्री कर सकते थे। मगर यह बिल संसद में पास नहीं हो सका।

इस साल 9 जुलाई को नेपाल के गंडकी प्रांत की विधानसभा ने औषधीय और औद्योगिक इस्तेमाल के लिए गांजे की खेती का लाइसेंस देने वाला बिल सर्वसम्मति से पास किया था। ऐतिहासिक रिकॉर्ड के मुताबिक 1970 के दशक की शुरुआत तक नेपाल में गांजे की खेती और बिक्री कानूनी थी। लेकिन 1960 और 1970 के दशक में पश्चिमी देशों से बड़ी संख्या में हिप्पी नेपाल आने लगे। इससे गांजे और हशीश की मांग बढ़ी और बड़ा बाजार बन गया।

कुछ शोधकर्ताओं के मुताबिक उस समय अमेरिका की चलाई जा रही 'वॉर ऑन ड्रग्स' मुहिम के दबाव में नेपाल ने गांजे की खेती और बिक्री पर बैन लगाया था।

पिछले कुछ सालों में दुनिया भर में गांजे के औषधीय इस्तेमाल पर चर्चा बढ़ी है। अमेरिका के कई राज्यों में औषधीय इस्तेमाल के लिए कैनबिस को कानूनी मान्यता मिल चुकी है, और कुछ राज्यों में मनोरंजन के लिए भी इसकी इजाजत है। इस पृष्ठभूमि में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अहम माना जा रहा है।

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