मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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19:13 IST

महाराष्ट्र की बेटी नीला विखे पाटील स्वीडन की संसद के लिए चुनी गईं

स्टॉकहोम से जीत दर्ज करके अहिल्यानगर में जन्मीं और पली-बढ़ीं नीला विखे पाटील स्वीडन की संसद में पहुंचीं

महाराष्ट्र की बेटी नीला विखे पाटील स्वीडन की संसद के लिए चुनी गईं
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

महाराष्ट्र के राजनीतिक और सहकार क्षेत्र में मशहूर विखे पाटील परिवार का नाम अब दुनिया के नक्शे पर भी चमक रहा है। शिक्षाविद अशोक विखे पाटील की 41 साल की बेटी नीला विखे पाटील स्वीडन की संसद की सदस्य बन गई हैं। 13 सितंबर को हुए आम चुनाव में उन्होंने स्टॉकहोम शहर के निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल की। नीला ग्रीन पार्टी की नेता हैं और अब वे भारत और महाराष्ट्र, दोनों का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन कर रही हैं।

नीला को राजनीति और समाजसेवा के संस्कार घर से ही मिले हैं। वे एशिया के पहले सहकारी शुगर फैक्ट्री के संस्थापक सहकार महर्षी विठ्ठलराव विखे पाटील की परपोती हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय बाळासाहेब विखे पाटील की पोती हैं, और महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील की भतीजी हैं। स्वीडन की 349 सदस्यों वाली संसद, रिक्सडॅग, में चुनकर पहुंचने वाली वे भारतीय मूल की प्रमुख नेताओं में से एक बन गई हैं।

नीला का जन्म स्वीडन में हुआ, मगर उनका बचपन और शुरुआती पढ़ाई महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) में हुई। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई में लगातार तरक्की की। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से इकोनॉमिक्स और लॉ में डिग्री ली और साथ ही MBA भी पूरा किया। इसके अलावा उन्होंने मैड्रिड की यूनिवर्सिटी डी कॉम्प्ल्युटेन्स से भी MBA किया है। 2020 से वे ग्लोबल कंसल्टिंग कंपनी PwC (प्राइसवॉटरहाऊसकूपर्स) में स्ट्रैटेजी, मैनेजमेंट, टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम कर रही हैं।

नीला पिछले 25 सालों से स्वीडन की ग्रीन पार्टी में सक्रिय और वजनदार नेता रही हैं। संसद पहुंचने से पहले वे स्वीडन के पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यालय में स्पेशल पॉलिटिकल एडवाइजर रह चुकी हैं, जहां उन्होंने फाइनेंस, टैक्स सिस्टम और हाउसिंग जैसे मुद्दे संभाले। वे स्टॉकहोम म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन की काउंसिल मेंबर भी रह चुकी हैं और फिलहाल स्टॉकहोम ग्रीन पार्टी की इलेक्शन कमेटी की सदस्य हैं।

सांसद चुने जाने के बाद नीला ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा, "स्वीडन की 349 सदस्यों वाली संसद में देश और स्टॉकहोम शहर का प्रतिनिधित्व करते हुए मुझे बहुत खुशी हो रही है। मैं वही काम करना चाहती हूं जिस पर मेरे दादा (बाळासाहेब विखे पाटील) को गर्व हो।" उन्होंने बताया, "जब मैं सिर्फ 15 साल की थी, तब दादा ने मुझसे राज्य का बजट पढ़वाया था, और वहीं से मेरे राजनीतिक सफर की असली नींव पड़ी। अपनी जिंदगी के आखिरी दिनों में वे मुझे हर हफ्ते फोन किया करते थे।" महाराष्ट्र में शिक्षा संस्थानों की चेन चलाने वाले विखे पाटील फाउंडेशन के अध्यक्ष और नीला के पिता अशोक विखे पाटील ने अपनी बेटी की इस बड़ी कामयाबी पर खुशी और गर्व जताया है।

अपनी आगे की भूमिका पर बात करते हुए नीला ने कहा, "मैं ऐसे समाज में योगदान देना चाहती हूं जहां हर बच्चे को बेहतर भविष्य का मौका मिले। जो लोग वोट नहीं दे सकते, उनकी आवाज बनना मुझे अच्छा लगेगा। हम सबको साफ पानी, समृद्ध प्रकृति और इंसानों की गलतियों से होने वाली प्राकृतिक आपदाएं कम वाला देश चाहिए।" भारत के प्रति अपने लगाव पर उन्होंने कहा, "मुझे भारत से बहुत प्यार है और यहां के लोगों से मुझे बहुत अपनापन महसूस होता है। मेरे कई करीबी दोस्त भारतीय हैं।"

13 सितंबर के चुनाव में स्वीडन की वामपंथी विपक्षी पार्टियों को मामूली बहुमत मिला। स्वीडिश इलेक्शन कमीशन के मुताबिक, 349 सीटों वाली रिक्सडॅग संसद के चुनाव में विपक्ष के 4 गुटों ने 176 सीटें जीतीं, जबकि सत्तारूढ़ और कंजरवेटिव गठबंधन को 173 सीटें मिलीं। विपक्ष में शामिल ग्रीन पार्टी का मुख्य फोकस पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित राजनीति पर है।

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