रूस और यूक्रेन दोनों के इमरजेंसी अलर्ट ऐप हैक, मोबाइल पर आए परमाणु हमले के झूठे संदेश
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दोनों देशों की राष्ट्रीय आपातकालीन सूचना प्रणालियों पर साइबर हमले हुए। लोगों के फोन पर रासायनिक, रेडिएशन और परमाणु हमले की झूठी चेतावनियां दिखीं।
रूस और यूक्रेन की जंग अब सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रही। डिजिटल और साइबर दुनिया में भी मामला बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। एक तरफ दोनों देशों के बीच ऊंचे स्तर की कूटनीतिक और मानवीय बातचीत के रास्ते तलाशे जा रहे हैं, और दूसरी तरफ दोनों की राष्ट्रीय आपातकालीन सूचना प्रणालियों (Emergency Alert Systems) पर भारी साइबर हमले होने की चौंकाने वाली बात सामने आई है।
इस हैकिंग की वजह से लोगों के मोबाइल पर अचानक रासायनिक, रेडिएशन और परमाणु हमले की झूठी चेतावनियां (Fake Radiation Alerts) दिखने लगीं। नतीजा यह हुआ कि दोनों देशों की आम जनता में जबरदस्त घबराहट फैल गई।
यूक्रेन के प्रशासन ने जो जानकारी दी, उसके मुताबिक पूरे देश में हवाई हमलों की पहले से खबर देने वाला सरकारी "एयर रेड अलर्ट" (Air Raid Alert) ऐप दुश्मन ने हैक कर लिया। इस घुसपैठ के बाद लाखों यूक्रेनी नागरिकों के फोन पर कीव और आसपास के इलाकों में "रेडिएशन का खतरा" (Radiation Threat) और "रासायनिक हमले की आशंका" वाले इमरजेंसी संदेश अचानक चमकने लगे। यही नहीं, कीव की सड़कों पर लगे लाउडस्पीकर सिस्टम से भी कुछ देर के लिए बेचैन करने वाले संदेश सुनाई दिए, जिससे सड़कों पर अफरातफरी का माहौल बन गया।
इस गड़बड़ी के बाद यूक्रेनी वायुसेना (Ukrainian Air Force) ने फौरन अपने आधिकारिक टेलीग्राम चैनल पर सफाई जारी की। वायुसेना ने कहा, "एयर अलर्ट ऐप के सिस्टम में बाहरी दखल से छेड़छाड़ की गई है। देश में किसी भी तरह का रेडिएशन या रासायनिक खतरा पैदा नहीं हुआ है। लोग किसी अफवाह के झांसे में न आएं और घबराएं नहीं।" वहीं यूक्रेन के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन मंत्रालय ने X (ट्विटर) पर पोस्ट कर बताया कि मुख्य राष्ट्रीय अलर्ट सिस्टम सुरक्षित है और पहले की तरह सामान्य तरीके से चल रहा है।
दूसरी तरफ, रूस के आपातकालीन स्थिति मंत्रालय (Ministry of Emergency Situations) के मोबाइल ऐप पर भी एक ही समय में ऐसा ही बड़ा साइबर हमला कराया गया। बताया गया है कि हैकरों ने इस सरकारी ऐप का गलत इस्तेमाल करके रूसी नागरिकों को संभावित सुरक्षा खतरे के बारे में झूठी और भ्रामक जानकारी भेजी। रूसी प्रशासन ने इस घटना को गंभीरता से लिया है। सिस्टम की खामियां दूर करने और हैकिंग की जड़ तक पहुंचने का काम तेजी से शुरू कर दिया गया है।
साइबर हमलों की इस कड़ी के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने वैश्विक शांति और अर्थव्यवस्था को लेकर अहम बयान दिया है। उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बीच में पड़ने की अपील की। जेलेंस्की ने कहा कि चल रहे संघर्ष का असर दुनिया के ऊर्जा बाजार और ईंधन की कीमतों पर गंभीर रूप से पड़ रहा है। एक इंटरव्यू का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति को इन वैश्विक नतीजों का ख्याल रखते हुए दोनों देशों के बीच "ऊर्जा युद्धविराम" (Energy Ceasefire) कराने की पहल करनी चाहिए, ताकि कम से कम ऊर्जा ढांचे पर होने वाले हमले रुक सकें।
इन घटनाओं से साफ होता है कि आगे की लड़ाइयां सिर्फ मिसाइलों से नहीं लड़ी जाएंगी, बल्कि डिजिटल जानकारी के जरिए लोगों का हौसला तोड़कर भी लड़ी जा रही हैं। फिलहाल दोनों तरफ की सुरक्षा एजेंसियां अपने साइबर ग्रिड को और मजबूत करने में लगी हैं।
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