मंगलवार, 3 नवंबर 2026

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अमेरिका में H-1B और L-1 एक्सटेंशन की हर अर्जी की नए सिरे से जांच का प्रस्ताव

अमेरिका में H-1B और L-1 एक्सटेंशन की हर अर्जी की नए सिरे से जांच का प्रस्ताव तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग के प्रस्ताव में पुरानी मंजूरी को आधार मानने की बाध्यता हटाने की बात है। इसका असर भारतीय पेशेवरों पर पड़ सकता है।

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन की एक प्रस्तावित इमिग्रेशन नीति से H-1B और L-1 वीजा पर काम करने वाले भारतीय पेशेवरों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। प्रस्ताव के मुताबिक वीजा एक्सटेंशन की अर्जी पर फैसला करते वक्त अमेरिकी इमिग्रेशन अफसरों के लिए पहले मिली वीजा मंजूरी को आधार मानना जरूरी नहीं रहेगा। यानी हर एक्सटेंशन अर्जी की जांच नए सिरे से हो सकती है।

यह प्रस्ताव अमेरिका के गृह सुरक्षा विभाग (DHS) ने रखा है। इसका नाम 'Removing Deference to Prior USCIS Determinations of Eligibility' है। इसे 14 अक्टूबर को फेडरल रजिस्टर में छापा गया था। आम लोग 13 नवंबर तक इस पर अपनी सूचनाएं और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

अभी 8 CFR 214.1(c)(5) नाम का नियम लागू है। इसके तहत अगर किसी कर्मचारी को पहले वीजा मंजूर हो चुका है और उसकी नौकरी या हालात में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, तो अफसरों से आम तौर पर उम्मीद की जाती है कि वे उस पुराने फैसले का सम्मान करें। प्रस्तावित बदलाम लागू हुआ तो यह सहूलियत नहीं रहेगी। तब H-1B और L-1 के अलावा O-1, TN, E और P श्रेणी के वीजा आवेदनों की भी हर बार नए सिरे से जांच हो सकती है।

भारतीयों पर इसका असर सबसे ज्यादा पड़ने की बात कही जा रही है। अमेरिकी नागरिकता और इमिग्रेशन सेवा (USCIS) के आंकड़ों के मुताबिक आर्थिक वर्ष 2024 में H-1B वीजा की करीब 3.99 लाख अर्जियां मंजूर हुईं। इनमें से 71 प्रतिशत लाभार्थी भारत में पैदा हुए थे।

रोजगार जारी रखने की श्रेणी में करीब 2.58 लाख अर्जियां मंजूर हुईं। इनमें से 2.03 लाख, यानी 79 प्रतिशत, भारतीय पेशेवरों की थीं। इसी वजह से माना जा रहा है कि भारतीय आईटी और टेक्नोलॉजी सेक्टर के कर्मचारियों को इस बदलाव का सबसे ज्यादा नुकसान हो सकता है।

DHS के अंदाजे के मुताबिक इस बदलाव से हर साल करीब 2.08 लाख अर्जियां प्रभावित हो सकती हैं। अतिरिक्त कागजात मांगने वाले Request for Evidence (RFE) नोटिस में करीब 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है। इसका मतलब है कि हर साल लगभग 6 हजार अतिरिक्त नोटिस जारी होंगे। विभाग ने यह भी बताया है कि ऐसे मामलों में अर्जी निपटाने में औसतन 64 दिन ज्यादा लग सकते हैं।

गृह सुरक्षा विभाग का कहना है कि मौजूदा नियम में इमिग्रेशन अफसरों पर यह साबित करने की जिम्मेदारी आती है कि वे पहले के फैसले से अलग फैसला क्यों दे रहे हैं। प्रस्तावित बदलाव के बाद अफसरों को हर अर्जी को अलग से और उस वक्त के हालात के हिसाब से परखने की आजादी मिलेगी।

विभाग ने यह भी साफ किया है कि अफसर पुरानी वीजा मंजूरी को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं करेंगे। फर्क इतना होगा कि वह आगे के फैसले के लिए बाध्यकारी आधार नहीं रहेगी।

अमेरिका में पुरानी मंजूरी को तवज्जो देने की यह व्यवस्था 2004 में शुरू हुई थी। ट्रम्प के पहले कार्यकाल में 2017 में इसे रद्द कर दिया गया। फिर 2021 में इसे दोबारा लागू किया गया और 2024 में इसे औपचारिक नियमों में शामिल किया गया था। अब एक बार फिर इस नियम को बदलने का प्रस्ताव चर्चा में है।

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