चंद्रपुर में नुक्कड़ नाटक और दीवार पेंटिंग से पानी बचाने और महिला किसान पंजीकरण की मुहिम
महिला आर्थिक विकास महामंडल (माविम) चंद्रपुर जिले के गांवों में पानी की बचत और महिलाओं को किसान के तौर पर दर्ज कराने का संदेश दे रहा है।
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चंद्रपुर जिले के गांवों में इन दिनों नुक्कड़ नाटक हो रहे हैं। महिला आर्थिक विकास महामंडल (माविम), चंद्रपुर की तरफ से यह जनजागृति मुहिम चलाई जा रही है। मुहिम के दो मकसद हैं। एक, पानी की किल्लत से निपटने के लिए जल संवर्धन की अहमियत समझाना। दूसरा, खेती में मेहनत करने वाली महिलाओं को "किसान" के तौर पर सरकारी पहचान दिलाना, ताकि वे सरकारी योजनाओं का फायदा ले सकें।
जिले में इस साल बारिश कम हुई है, जिससे सूखे जैसे हालात बन गए हैं और पानी की किल्लत है। ऐसे में मौजूद पानी के स्रोतों को बचाना और पानी का किफायत से इस्तेमाल करना बहुत जरूरी हो गया है। इसी को देखते हुए माविम के तहत काम करने वाले लोकसंचालित साधन केंद्र (LRC) और महिला बचत समूहों के सदस्यों ने पहल की है।
यह मुहिम "नवतेजस्विनी महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास" उपक्रम के तहत चल रही है। महिला बचत समूहों की सदस्य गांव के मुख्य चौक, हफ्ते के बाजार और ग्राम पंचायत परिसर में नुक्कड़ नाटक पेश कर रही हैं। इसके अलावा गांवों में दीवारों पर आकर्षक चित्र बनाकर भी लोगों तक संदेश पहुंचाया जा रहा है। गांव वालों से इन नाटकों को अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।
नाटकों में रोजमर्रा की जिंदगी में पानी की बर्बादी रोकने, बारिश के पानी को रोककर जमीन में उतारने, खेती में ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने और सूखे में पानी का सही प्रबंधन करने के बारे में बताया जा रहा है। स्थानीय बोली, चुटीले संवाद और असरदार अभिनय के जरिए पानी बचाने और जल संरक्षण का संदेश गांव वालों के दिल तक पहुंचाया जा रहा है।
मुहिम में महिलाओं के किसान के रूप में पंजीकरण पर खास जोर है। बुवाई से लेकर कटाई तक खेती के हर चरण में महिलाओं का बड़ा योगदान होता है। लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में किसान के तौर पर दर्ज न होने से कई महिलाएं सरकारी योजनाओं के फायदे से वंचित रह जाती हैं। महिलाओं को बताया जा रहा है कि अगर वे जरूरी कागजात के साथ पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी कर लें, तो उन्हें कृषि योजनाओं, बीज और खाद पर सब्सिडी, फसल बीमा, कृषि कर्ज और खेती से जुड़े कारोबार के मौकों का फायदा लेना आसान होगा।
इस जनजागृति मुहिम में माविम के तहसील समन्वयक, सहयोगिनी, समुदाय संसाधन व्यक्ति (CRP), गांव के प्रतिनिधि, ग्राम पंचायत के पदाधिकारी, महिला बचत समूहों की अध्यक्ष और सचिव के साथ बड़ी संख्या में गांव वाले हिस्सा ले रहे हैं। सूखे के हालात में लोगों की भागीदारी बढ़ाकर जल संरक्षण करना और किसान महिलाओं को उनके हक की जानकारी देना, इस उपक्रम का मकसद है। ग्रामीण इलाकों में यह उपक्रम काफी अहम साबित हो रहा है।