अकोला में आवारा कुत्तों की भरमार, कई लोगों को काटा; नसबंदी पर उठे सवाल
अकोला शहर में आवारा कुत्तों की तादाद बढ़ रही है और नसबंदी का काम टेंडर में अटका है।
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
अकोला शहर में आवारा कुत्तों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। इन पर काबू पाने के लिए महानगरपालिका, नगर परिषद और नगर पंचायतें नसबंदी मुहिम चलाती हैं। लेकिन इस मुहिम की खामियों, धीमी रफ्तार और टेंडर प्रक्रिया की अड़चनों की वजह से शहर में कुत्तों की तादाद घटने के बजाय बढ़ रही है।
अकोला शहर के आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए संस्थाओं से उम्मीद के मुताबिक जवाब नहीं मिल रहा, इसलिए यह काम अटका पड़ा है। महानगरपालिका ने दो बार टेंडर निकाला, फिर भी कोई जवाब नहीं आया। इसके बाद उसने तीसरी बार टेंडर निकाला।
क्या दखलअंदाजी की वजह से संस्थाएं आगे नहीं आ रहीं? शहर में आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए होमगार्ड दफ्तर से सटे महानगरपालिका के बंद स्कूल में ऑपरेशन किए गए थे। पहली संस्था का ठेके का समय खत्म हुआ तो काम दूसरी संस्था को दिया गया। मगर कुछ कुत्तों की नसबंदी के बाद इस संस्था ने भी काम बंद कर दिया। फिर दोबारा टेंडर निकाले गए, पर किसी भी संस्था ने जवाब नहीं दिया। बताया जाता है कि नसबंदी का काम शुरू होने के बाद संबंधित संस्थाओं के काम में दखल दिया जाता है। जानकारी है कि अब तक दो संस्थाओं को ऐसे हालात का सामना करना पड़ा है। इसी वजह से संस्थाओं से जवाब न मिलने की चर्चा है।
नायगाव डम्पिंग ग्राउंड पर शेल्टर होम बनाया गया है। महानगरपालिका ने नायगाव के डम्पिंग ग्राउंड पर आवारा कुत्तों के लिए करीब सात हजार वर्ग फुट का शेल्टर होम खड़ा किया है। शेल्टर के मानकों में बदलाव की सूचनाओं के मुताबिक जरूरी सुधार किए जा चुके हैं। कुत्ते पकड़ने का काम ठेकेदार को दिया गया है और हर कुत्ते के पीछे 200 रुपये दिए जाएंगे। शुरुआत में सरकारी दफ्तरों के परिसर के कुत्ते पकड़े जाएंगे। उनके खाने का इंतजाम महानगरपालिका को करना होगा। कहा जा रहा है कि आगे चलकर इस शेल्टर में दस हजार कुत्ते रखने की क्षमता होगी, लेकिन फिलहाल करीब 400 कुत्ते रखने लायक इंतजाम है।
शहर में 15 हजार से ज्यादा आवारा कुत्ते होने का अंदाजा है। कई इलाकों में इनके घूमने से लोग परेशान हैं और कुत्तों के काटने से कई लोगों को इलाज कराना पड़ा है। आवारा कुत्तों को पकड़कर शहर के बाहर छोड़ने के तरीके पर पाबंदी है, इसलिए उनकी तादाद काबू में रखने के लिए नसबंदी पर जोर दिया जा रहा है।
अकोला महानगरपालिका (AMC) की हद में अंदाजन 25000 से 30000 आवारा कुत्ते बताए गए हैं। रोज 40 से 60 लोगों को कुत्ते काटते हैं। जिला सरकारी मेडिकल कॉलेज (GMC Akola) में रोज इतने मरीज इंजेक्शन के लिए आते हैं।
कुत्ता काट ले तो फौरन जख्म को साबुन और बहते पानी से 15 मिनट तक धोना चाहिए। हल्दी, मिर्च या चूना नहीं लगाना चाहिए। अकोला के जिला अस्पताल या महानगरपालिका के अस्पतालों में ARV (Anti-Rabies Vaccine) मुफ्त मिलती है।
AMC ने 21 मार्च 2026 को नया टेंडर निकाला, जो अकोला महानगरपालिका क्षेत्र में आवारा कुत्तों को पकड़ने, उनकी नसबंदी और रेबीज के टीके के लिए एजेंसी की नियुक्ति का है।
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