उत्तर कोरिया के परमाणु हथियारों पर अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया एकजुट
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अटलांटा में जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने उत्तर कोरिया के पूरे और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण के लिए प्रतिबद्धता जताई।
उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन के लगातार बढ़ते परमाणु और मिसाइल जखीरे को लेकर पूर्वी एशिया समेत पूरी दुनिया में चिंता है। इसी बीच अमेरिका, दक्षिण कोरिया और जापान के विदेश मंत्रियों ने एक साथ आकर उत्तर कोरिया के संपूर्ण और अपरिवर्तनीय परमाणु निरस्त्रीकरण (Complete Denuclearization) के लिए अपनी प्रतिबद्धता का ऐलान किया है।
यह बैठक अटलांटा में हुई जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के मौके पर हुई। इसमें अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सू मोटेगी और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चोई ह्यून शामिल थे। तीनों देशों ने सिर्फ उत्तर कोरिया की परमाणु चुनौती पर बात नहीं की। उन्होंने पैसिफिक आर्कटिक इलाके में समुद्री सुरक्षा, सप्लाई चेन को मजबूत करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर दस्तखत भी किए।
यह सब ऐसे वक्त हुआ है जब ट्रम्प और किम की संभावित शिखर बैठक की चर्चा चल रही है। इस चर्चा के बीच उत्तर कोरिया ने अपने परमाणु हथियार खत्म करने से साफ इनकार कर दिया है। प्योंगयांग की सरकार अपनी परमाणु क्षमता को कानूनी तौर पर 'स्थायी और अपरिवर्तनीय' (Irreversible Status) घोषित कर चुकी है। बताया गया है कि रूस और चीन का छुपा और सीधा समर्थन मिलने से किम जोंग-उन का भरोसा और बढ़ा है। आने वाली एशिया-पैसिफिक आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर बैठक के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और किम जोंग-उन की मुलाकात की संभावना जताई जा रही है।
ट्रम्प पहले कई बार किम जोंग-उन से सीधी बातचीत की तैयारी दिखा चुके हैं। ट्रम्प के मुताबिक उत्तर कोरिया को डी-न्यूक्लियराइज करने के बजाय उसके परमाणु कार्यक्रम को एक तय सीमा में 'फ्रीज' (Freeze) करना ज्यादा व्यावहारिक होगा। इसके बदले उत्तर कोरिया पर लगी सख्त आर्थिक पाबंदियों में कुछ ढील देने पर विचार हो सकता है, ऐसी बात दक्षिण कोरिया के राजनीतिक हलकों से भी उठी थी। लेकिन उत्तर कोरिया ने बातचीत से पहले ही किसी भी तरह का निरस्त्रीकरण मानने से सीधे मना कर दिया है।
कूटनीतिक बातचीत की चर्चा के बीच उत्तर कोरिया ने एक बार फिर अपनी सैन्य ताकत दिखाई। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ की जानकारी के मुताबिक उत्तर कोरिया ने वॉनसान इलाके से पूर्वी समुद्र (Sea of Japan) की ओर एक साथ 10 कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें (Short-Range Ballistics) दागीं। इस अचानक मिसाइल परीक्षण के बाद जापान और दक्षिण कोरिया में अलर्ट जारी किया गया।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के नियमों और पाबंदियों का खुला उल्लंघन करते हुए उत्तर कोरिया लगातार अपने हथियारों का परीक्षण कर रहा है। तीनों देशों के विदेश मंत्रियों ने इन गैरकानूनी मिसाइल कार्यक्रमों को पैसा पहुंचाने वाले गुप्त नेटवर्क और गैरकानूनी आर्थिक लेनदेन पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पूरी तरह रोक लगाने की जोरदार मांग की है।
उत्तर कोरिया का यह कदम सिर्फ पूर्वी एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे पैसिफिक इलाके की सुरक्षा के लिए खतरा है। इसी वजह से अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने सैन्य सहयोग के साथ आर्थिक और तकनीकी मोर्चे पर भी साथ आने का फैसला किया है। आर्कटिक इलाके में सहयोग से तीनों देशों के लिए समुद्री रास्तों की हिफाजत और तकनीकी सप्लाई चेन को सुरक्षित रखना आसान होगा। बैठक से यह साफ संदेश दिया गया है कि उत्तर कोरिया कितना भी दबाव बनाए, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं होगा। अब पूरी दुनिया की नजर इस पर है कि ट्रम्प और किम जोंग-उन की मुलाकात होती है या नहीं और उससे इस तनाव का कोई हल निकलता है या नहीं।
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