मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026

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18:54 IST

अमेरिकी थिंक टैंक की सलाह: चीन के पास से फौज हटाकर दूर के द्वीपों पर ले जाए अमेरिका

Defense Priorities की नई रिपोर्ट में एशिया में अमेरिकी फौज की तैनाती बदलने का सुझाव है, लेकिन अमेरिका ने अभी कोई फैसला नहीं किया है।

अमेरिकी थिंक टैंक की सलाह: चीन के पास से फौज हटाकर दूर के द्वीपों पर ले जाए अमेरिका
एआई से बनाई गई प्रतीकात्मक तस्वीर; यह घटना का वास्तविक फोटो नहीं है | PT24

अमेरिका और चीन के बीच बढ़ती सामरिक होड़ के बीच एक नई रिपोर्ट की खूब चर्चा हो रही है। यह रिपोर्ट अमेरिका के थिंक टैंक Defense Priorities ने तैयार की है और इसमें एशिया में अमेरिकी फौज की तैनाती को लेकर बड़ा सुझाव दिया गया है।

रिपोर्ट की सिफारिश है कि अमेरिका चीन के नजदीक पड़ने वाली फर्स्ट आयलंड चेन से अपनी फौजी मौजूदगी घटाए और फौज को ज्यादा दूर यानी सेकंड आयलंड चेन की तरफ ले जाए। वजह यह बताई गई है कि फर्स्ट आयलंड चेन पर आसानी से वार करने वाली मिसाइलें चीन के पास काफी ज्यादा हैं।

दूसरी तरफ, अगर अमेरिकी फौज सेकंड आयलंड चेन पर चली जाए, तो वहां हमला करने लायक मिसाइलें चीन के पास ज्यादा नहीं हैं। थिंक टैंक के मुताबिक अगर ताइवान या जापान को लेकर चीन और अमेरिका में टकराव हुआ, तो चीन के करीब रहकर लड़ना अमेरिका को बिल्कुल नहीं पुसाएगा। रिपोर्ट से यही तस्वीर निकलती है कि चीन की बढ़ी ताकत अब अमेरिका को पीछे हटने पर मजबूर कर रही है।

ताइवान और जापान की हिफाजत की जिम्मेदारी अमेरिका ने ले रखी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे जुड़े कागजी करार भी अब रद्द करने का वक्त आ गया है। डर यह जताया गया है कि ताइवान और जापान को बचाने की कोशिश में चीन और नॉर्थ कोरिया की मिसाइलें अमेरिका की जमीन तक पहुंच सकती हैं।

रिपोर्ट के हिसाब से चीन ताइवान को अपना भूभाग कभी भी घोषित कर सकता है। ऐसे में अमेरिका चीन से लड़ाई करेगा, इसकी संभावना कम दिखती है। दुनिया की राजनीति के जानकार कह रहे हैं कि ताइवान और जापान अब अमेरिका के नहीं, भगवान भरोसे रहेंगे।

रिपोर्ट में जापान, साउथ कोरिया और फिलिपिन्स के आसपास अमेरिकी फौज की मौजूदगी चरणबद्ध तरीके से घटाने की बात है। इसकी जगह गुआम, नॉर्दन मारियाना आयलैंड्स, पलाऊ, माइक्रोनेशिया और मार्शल आयलैंड्स जैसे इलाकों में अमेरिकी फौज और सैन्य साजो-सामान जमा करने का प्रस्ताव है, जो चीन से अपेक्षाकृत दूर हैं।

रिपोर्ट सुझाव देती है कि ज्यादातर बदलाव 2030 तक पूरे हों और बाकी 2035 तक। खासकर जापान में अमेरिकी फौजियों की गिनती काफी घटाने का विचार रखा गया है। साथ ही बड़े फौजी अड्डों की जगह ज्यादा सुरक्षित ठिकानों पर वायुसेना, नौसेना, पनडुब्बियां, ड्रोन और खुफिया तंत्र की ताकत रखने की बात कही गई है।

फिर भी इस प्रस्ताव का मतलब यह नहीं कि अमेरिका सच में एशिया से हट रहा है। अगस्त 2026 में अमेरिका की रक्षा नीति के वरिष्ठ अधिकारी एल्ब्रिज कोल्बी ने साफ किया था कि अमेरिका इंडो-पैसिफिक से पीछे नहीं हट रहा। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के करीब की फर्स्ट आयलंड चेन पर अमेरिका का रणनीतिक ध्यान बना हुआ है। यानी यह रिपोर्ट नीति पर चल रही बहस का हिस्सा है और इससे यह साबित नहीं होता कि अमेरिका ने चीन के पास से फौज हटाने का आखिरी फैसला कर लिया है।

लेकिन यह कोई मामूली रिपोर्ट भी नहीं है। इसे Dan Caldwell और Jennifer Kavanagh ने लिखा है, जो डोनाल्ड ट्रंप की विचारधारा के कट्टर समर्थक हैं। इसलिए अमेरिका में कई लोगों की राय है कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए।

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