होर्मुझ में तेल टैंकर पर लिम्पेट माइन्स से हमला, इंजन रूम में लगी आग
तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
पनामा के झंडे वाले टैंकर 'लुईस 1' पर 29 अक्टूबर को दो लिम्पेट माइन्स जोड़ी गईं। जहाज कुछ देर के लिए बेकार हो गया, क्रू सुरक्षित बताया गया है।
दुनिया के सबसे अहम तेल रास्तों में गिने जाने वाले होर्मुझ जलडमरूमध्य में तेल ले जाने वाले जहाजों की सुरक्षा का सवाल फिर गंभीर हो गया है। जानकारी सामने आई है कि जहाजों पर हमले के लिए लिम्पेट माइन्स का इस्तेमाल किया गया। ये एक खास तरह की चुंबकीय विस्फोटक होती हैं।
29 अक्टूबर को पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर 'लुईस 1' पर दो लिम्पेट माइन्स जोड़ी गईं। इन धमाकों से जहाज के इंजन रूम में आग लग गई और जहाज कुछ समय के लिए बेकार हो गया। बताया गया है कि जहाज पर मौजूद क्रू के लोग सुरक्षित हैं।
लिम्पेट माइन्स ऐसी विस्फोटक होती हैं जो चुंबक की मदद से जहाज के बाहरी निचले हिस्से या किसी और धातु वाले हिस्से से चिपक जाती हैं। इन्हें जहाज के पास पहुंचकर लगाया जाता है। इसके बाद तय सिस्टम के जरिए इनमें धमाका किया जा सकता है। ऐसे हमले में जहाज के इंजन सिस्टम, फ्यूल स्टोरेज और दूसरे जरूरी हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसलिए जहाज पूरी तरह न डूबे, तब भी उसका माल ढोने का काम ठप हो सकता है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस हमले में एक छोटी बोट का इस्तेमाल करके जहाज के करीब विस्फोटक पहुंचाए गए। छोटी बोटें तेज चलती हैं और उनकी हरकत पर नजर रखना बड़े जहाजों के लिए मुश्किल हो सकता है। होर्मुझ जैसे तंग और भीड़ वाले समुद्री रास्ते में ऐसे हमलों का खतरा और बढ़ जाता है। हालांकि इस हमले के पीछे ईरान का हाथ होने की अब तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
होर्मुझ जलडमरूमध्य दुनिया के एनर्जी कारोबार के लिए बेहद अहम है। दुनिया के कच्चे तेल की बड़ी खेप इसी रास्ते से गुजरती है। इसलिए इस इलाके में जहाजों पर हमले बढ़े तो तेल ढुलाई का खर्च, बीमा का प्रीमियम और कच्चे तेल के दाम बढ़ने की आशंका है। 'लुईस 1' पर हुए हमले के बाद इस रूट से गुजरने वाले कारोबारी जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष की पृष्ठभूमि में इस समुद्री रास्ते के हालात और भी संवेदनशील हो गए हैं।
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