शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

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अमेरिका-ईरान करार के मसौदे में यूरेनियम हटाने की शर्त, कतर और चीन की भूमिका

अमेरिका-ईरान करार के मसौदे में यूरेनियम हटाने की शर्त, कतर और चीन की भूमिका तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं
दुनिया PT24 टीम

अमेरिका और ईरान के बीच टकराव रोकने के लिए करार का प्राथमिक मसौदा अंतिम किया गया है। इसमें दस्तखत के सात दिन के भीतर ईरान के उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार पर शर्त रखी गई है।

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य टकराव को रोकने के लिए एक अहम करार का प्राथमिक मसौदा अंतिम कर लिया गया है। मध्यपूर्व में लंबे वक्त से जारी जंग और सियासी तनाव के बीच यह बड़ी खबर सामने आई है। प्रस्तावित करार में अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को सुरक्षित करने के लिए बेहद कड़ी शर्तें रखी हैं।

मसौदे की मुख्य शर्त यह है कि करार पर दस्तखत होने के सिर्फ सात दिन के अंदर ईरान अपना उच्च संवर्धित यूरेनियम का भंडार किसी मंजूर किए गए तीसरे देश को सौंप दे या उसका दर्जा घटा दे।

करार सिर्फ परमाणु हथियारों तक सीमित नहीं है। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से सुरक्षित और खुला करने का प्रस्ताव भी है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिहाज से इस रास्ते को बेहद संवेदनशील माना जाता है। करार टिका रहे और दोनों पक्ष नियमों का पालन करें, इसके लिए चीन मध्यस्थ और गारंटर की जिम्मेदारी ले सकता है। सीधी बातचीत के लिए तुर्की के इस्तांबुल की जगह कतर की राजधानी दोहा में बैठक करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। अगर ईरान ये शर्तें मान लेता है, तो अमेरिका उस पर लगी आर्थिक पाबंदियां और समुद्री नाकेबंदी ढीली करेगा।

इस करार को जमीन पर उतारने के लिए कतर ने सक्रिय कूटनीतिक कदम उठाए हैं। कतर के विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री के वरिष्ठ सलाहकार की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार सुबह ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचा। यह प्रतिनिधिमंडल सीधे वॉशिंगटन के संपर्क में रहकर काम कर रहा है और तेहरान के वरिष्ठ अधिकारियों से युद्धविराम पर विस्तार से बात कर रहा है।

मसौदे के मुताबिक करार के हर चरण का पालन दोनों देश ठीक से कर रहे हैं या नहीं, यह जांचने के लिए एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय सत्यापन व्यवस्था (Verification Mechanism) बनाई जाएगी। इससे यह पक्का होगा कि स्वतंत्र जांच के बिना कोई भी देश पहले रियायत नहीं देगा। आगे कोई विवाद खड़ा हो या करार टूटे, तो सैन्य तनाव दोबारा न बढ़े, इसके लिए एक खास विवाद निपटारा समिति बनाने की भी योजना है।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कतर के राजदूत के जरिए ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रजाई को एक खास पत्र भेजा था। तेहरान में इस पत्र का स्वागत किया गया है। दोनों देशों के बीच सीधे सैन्य हमले रोकने की दिशा में इसे एक अहम कूटनीतिक पड़ाव माना जा रहा है। पत्र से संकेत मिला है कि अमेरिका अब और सख्त कार्रवाई की बजाय करार के जरिए शांति चाहता है।

ईरान के अंदरूनी प्रशासन में इस करार को लेकर जोरदार मंथन चल रहा है। लंबे समय से लगी आर्थिक पाबंदियों की वजह से ईरान की अर्थव्यवस्था बड़े संकट में है। ऐसे में कतर का लाया यह शांति प्रस्ताव ईरान के लिए राहत की सांस साबित हो सकता है। हालांकि अमेरिका शर्तों का पूरा पालन हुए बिना पाबंदियां नहीं हटाएगा, इसलिए दुनिया की नजर ईरान के रुख पर टिकी है।

इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए सख्त रुख दिखाया। ट्रंप ने कहा, "वॉशिंगटन को यह संघर्ष खत्म करने की बिल्कुल जल्दी नहीं है। वक्त अमेरिका के साथ है।" उन्होंने कहा कि यह कोई आम जंग नहीं है, बल्कि पिछले सात महीने से चल रही लड़ाई है।

ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की अंदरूनी आर्थिक हालत बेहद खराब हो चुकी है। उन्होंने कहा, "ईरान अमेरिकी अधिकारियों से बातचीत के लिए बहुत उतावला है। उनके पास अपने सैनिकों और पुलिस को तनख्वाह देने तक के पैसे नहीं बचे हैं। हालत खराब है, इसलिए वे बात करना चाहते हैं और चर्चा अभी चल रही है।" ट्रंप के इस बयान से ईरान पर दबाव और बढ़ गया है।

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