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उत्तर कोरिया के किम जोंग उन अचानक चीन के दांडोंग पहुंचे, वांग हुनिंग से हुई मुलाकात

किम जोंग उन ने रविवार को चीन के सीमावर्ती शहर दांडोंग का अचानक दौरा किया और वांग हुनिंग से मुलाकात की।

उत्तर कोरिया के किम जोंग उन अचानक चीन के दांडोंग पहुंचे, वांग हुनिंग से हुई मुलाकात तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

उत्तर पूर्व एशिया की राजनीति में रविवार को एक नया और अचानक मोड़ आया। उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन ने चीन के सीमावर्ती शहर दांडोंग का अनपेक्षित दौरा किया। उत्तर कोरिया की सरकारी न्यूज एजेंसी केसीएनए (KCNA) की जानकारी के मुताबिक, किम के इस गुप्त और अचानक हुए दौरे से दक्षिण कोरिया समेत पश्चिमी देशों के राजनयिक हलकों में काफी हलचल मच गई है।

इस दौरे में किम ने चीन के चौथे सबसे वरिष्ठ नेता वांग हुनिंग से मुलाकात की। इससे उन्होंने साफ संकेत दिया कि दोनों देशों के ऐतिहासिक और रणनीतिक सहयोग को और मजबूत किया जाएगा।

बताया गया है कि किम के साथ उत्तर कोरिया की सत्ताधारी वर्कर्स पार्टी और सरकार के बड़े अधिकारी भी थे। इस प्रतिनिधिमंडल में उत्तर कोरिया की विदेश मंत्री चो सोन हुई, किम की बेहद असरदार बहन किम यो जोंग और पार्टी के वरिष्ठ नेता जो योंग वॉन शामिल थे।

चीन की तरफ से बैठक की अगुवाई चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के वरिष्ठ नेता और चाइनीज पीपल्स पॉलिटिकल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष वांग हुनिंग ने की। उनके साथ चीन के विदेश मंत्री वांग यी समेत कई बड़े अधिकारी मौजूद थे। इस बैठक में दोनों देशों के आर्थिक, सैन्य और व्यापारिक रिश्तों को और मजबूत करने पर विस्तार से बात हुई।

सितंबर 2025 में बीजिंग के दौरे के बाद किम का यह पहला जाना-पहचाना चीन दौरा है। तब वे दूसरे विश्व युद्ध की समाप्ति की 80वीं वर्षगांठ पर हुए कार्यक्रमों के लिए चीन गए थे और राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिले थे। 2011 में सत्ता में आने के बाद किम का यह चीन का छठा दौरा है।

मुलाकात के दौरान वांग हुनिंग ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ओर से किम को शुभकामना संदेश दिया और सम्मान जताया। शी जिनपिंग की खास हिदायत पर किम के स्वागत में एक भव्य दावत भी रखी गई थी। इसके अलावा किम ने दांडोंग में बसें बनाने की एक बड़ी फैक्ट्री का दौरा किया और चीन की औद्योगिक तरक्की को देखा।

इस दौरे का भावनात्मक और ऐतिहासिक पहलू भी रहा। चीन इन दिनों 1950 से 1953 के बीच हुए कोरियाई युद्ध में अपनी हिस्सेदारी की 76वीं सालगिरह मना रहा है। इसी मौके पर किम ने उन चीनी सैनिकों के स्मारक पर जाकर पुष्पचक्र चढ़ाया और श्रद्धांजलि दी, जिन्होंने युद्ध में उत्तर कोरिया की रक्षा करते हुए जान गंवाई थी।

केसीएनए की रिपोर्ट के मुताबिक किम ने इस मौके पर कहा, "उत्तर कोरियाई क्रांति और हमारी जमीन की रक्षा के लिए जिन चीनी सैनिकों ने अपनी जान कुर्बान की, उनका यह योगदान उत्तर कोरिया और वहां की जनता कभी नहीं भूलेगी।" उन्होंने दोहराया कि खून से बने इस रिश्ते और दोनों देशों की पुरानी दोस्ती को आने वाले दिनों में और पक्का किया जाएगा।

किम की इस गुप्त यात्रा से दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां चौकन्नी हो गई हैं। वॉशिंगटन और सेऊल के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग के बीच इस मुलाकात से दिखता है कि चीन और उत्तर कोरिया करीब आ रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, उत्तर कोरिया पर अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों और आर्थिक मुश्किलों के दौर में चीन का यह समर्थन किम प्रशासन के लिए बहुत अहम माना जा रहा है। दांडोंग सीमा पर बसा शहर है और दोनों देशों के व्यापार का मुख्य केंद्र है, इसलिए इस मुलाकात से आर्थिक लेन-देन बढ़ाने की कोशिश भी की जा रही है।

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