अमेरिका में डेटा सेंटर तेज़ी से बढ़ रहे, करोड़ों लोगों के घरों के पास खुलेंगे नए सेंटर
AI और डिजिटल तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से अमेरिका में डेटा सेंटर बनाने की रफ्तार तेज़ हुई है, और इसका असर आम लोगों की ज़िंदगी पर दिखने लगा है।
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AI और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ने से अमेरिका में डेटा सेंटर बनाने की रफ्तार काफी तेज़ हो गई है। इंटरनेट, क्लाउड कंप्यूटिंग और AI सिस्टम का दायरा बढ़ता देखकर टेक कंपनियां अब बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर खड़े कर रही हैं। लेकिन इस डिजिटल क्रांति का असर अब सीधे आम लोगों की ज़िंदगी पर भी दिखने लगा है। जितना बड़ा विकास, उतना ही बड़ा असर प्रकृति और इंसान पर, यह बात अब सामने आने लगी है।
डेटा सेंटरों की गिनती बढ़ रही है, तो उनका भौगोलिक फैलाव भी तेज़ी से हो रहा है। इस वक्त करीब 17.3 करोड़ अमेरिकी नागरिक किसी न किसी डेटा सेंटर से 20 किलोमीटर के दायरे में रहते हैं। जिन प्रोजेक्टों का काम चल रहा है, वे पूरे हो जाएं और प्रस्तावित केंद्रों में से कुछ शुरू हो जाएं, तो यह संख्या 19.6 करोड़ तक पहुंचने का अंदाज़ा है। यानी अमेरिका की आबादी का बड़ा हिस्सा इस डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर के आसपास रहेगा।
इस मांग के पीछे AI की क्रांति है। चैट जीपीटी, क्लाउड कंप्यूटिंग, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग और दूसरी AI सेवाओं के लिए भारी मात्रा में कंप्यूटिंग क्षमता चाहिए। इसी वजह से गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियां डेटा सेंटरों में बड़ा निवेश कर रही हैं। अमेरिका में 3 हज़ार से ज़्यादा डेटा सेंटर चल रहे हैं, और 1500 से ज़्यादा नए केंद्र अलग-अलग चरणों में हैं।
डेटा सेंटरों के इस फैलाव से स्थानीय लोगों के सामने कुछ गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सर्वर को ठंडा रखने के लिए इन केंद्रों को बड़ी मात्रा में बिजली और पानी की ज़रूरत पड़ती है। इसके अलावा जनरेटर का शोर, उसकी गर्मी, ज़मीन का इस्तेमाल और प्रकृति पर पड़ने वाले असर को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। अमेरिका के कई इलाकों में नए डेटा सेंटर प्रोजेक्टों का स्थानीय लोग कड़ा विरोध करते दिख रहे हैं।
AI और डिजिटल अर्थव्यवस्था की होड़ में अमेरिका और चीन तेज़ी से आगे बढ़ रहे हैं। फिर भी सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरक्की की कीमत स्थानीय लोगों को चुकानी पड़ेगी। आने वाले दिनों में डेटा सेंटर बनाने और लोगों के जीवन स्तर के बीच संतुलन बनाए रखना अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती हो सकता है।
फिलहाल अमेरिका में इसका बड़े पैमाने पर विरोध नहीं हो रहा है, लेकिन वहां के डेटा सेंटर बाहर के देशों में भी अपनी जगह बनाना चाहते हैं। इसलिए आगे यह विकास किस हद तक जाता है, इस पर नज़र रखना ज़रूरी है।
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