चीन से आने वाले टायटॅनियम डायऑक्साइड पर फिर लगा एंटी-डंपिंग शुल्क
केंद्र सरकार ने चीन से आयात होने वाले कुछ टायटॅनियम डायऑक्साइड उत्पादों पर प्रति टन 460 से 681 डॉलर का एंटी-डंपिंग शुल्क दोबारा लगा दिया है।
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दिवाली से ठीक पहले भारत ने चीन के खिलाफ एक बड़ा व्यापारी कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने चीन से आयात होने वाले कुछ खास टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों पर एंटी-डंपिंग शुल्क फिर से लागू कर दिया है। यह शुल्क प्रति टन 460 से 681 डॉलर के बीच है।
सरकार का कहना है कि चीन से यह केमिकल कच्चा माल भारतीय बाजार में बहुत सस्ते दाम पर बेचा जा रहा था। इससे यहां के स्थानीय उद्योगों को नुकसान हो रहा था और उसी नुकसान को रोकने के लिए यह सख्त फैसला लिया गया है।
यह कदम एक नई जांच के नतीजों के बाद उठाया गया है। जांच में पाया गया कि चीन से कम कीमत पर होने वाला आयात भारत के घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचा रहा था। राजस्व विभाग ने शनिवार को जो अधिसूचना जारी की, उसके मुताबिक यह शुल्क पांच साल तक लागू रहेगा। लेकिन अगर इससे पहले इसे रद्द किया गया, इसमें सुधार किया गया या इसकी जगह कोई दूसरा शुल्क लगाया गया, तो यह अवधि कम हो सकती है।
इससे पहले मई 2025 में भी चीन से आने वाले टाइटेनियम डाइऑक्साइड पर एंटी-डंपिंग शुल्क लगाया गया था। मीडिया की खबरों के मुताबिक इंडियन पेंट एसोसिएशन ने एक केस दायर किया था, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय ने मामले पर दोबारा विचार करने का आदेश दिया। उसके बाद पहले लगाया गया शुल्क वापस ले लिया गया था।
फिर वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले व्यापार उपाय महानिदेशालय, यानी DGTR, ने इस मामले में नए सिरे से जांच शुरू की। 3 अगस्त को DGTR ने अपनी नई जांच के नतीजे जारी किए और शुल्क लगाने की सिफारिश की। जांच में सामने आया कि चीन से आने वाले उत्पाद डंपिंग वाले दामों पर बेचे जा रहे थे, जिससे भारत के घरेलू उत्पादकों को नुकसान हो रहा था।
टाइटेनियम डाइऑक्साइड एक सफेद रंगद्रव्य है। इसका इस्तेमाल पेंट, कोटिंग, प्लास्टिक और कई दूसरे उत्पाद बनाने में होता है। भारत में दिवाली से पहले पेंट और उससे जुड़े उत्पादों की मांग बढ़ जाती है। चीन से आने वाला सस्ता माल रुकने पर पेंट और प्लास्टिक बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ सकती है।
एंटी-डंपिंग शुल्क दूसरे देश से आयात किए गए उत्पादों पर लगने वाला एक अतिरिक्त शुल्क होता है। जब किसी देश की कंपनियां दूसरे देश के बाजार में अपना माल जरूरत से ज्यादा कम दाम पर बेचकर वहां के घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचाती हैं, तो जांच के बाद ऐसा शुल्क लगाया जा सकता है। इसका मकसद घरेलू उत्पादकों को गलत कीमत वाली होड़ से बचाना है। चीन से आने वाले इन खास टाइटेनियम डाइऑक्साइड उत्पादों पर शुल्क दोबारा लगाने का फैसला इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।
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