तीन महीने स्तनाग्र पर पपड़ी, इलाज बेअसर रहा; जांच में निकला शुरुआती स्टेज का ब्रेस्ट कैंसर
ठाणे की 51 साल की महिला के स्तनाग्र की त्वचा तीन महीने से उखड़ रही थी। एक्जिमा के इलाज से फर्क नहीं पड़ा, जांच में शुरुआती स्टेज का कैंसर मिला।
स्तनाग्र की त्वचा बार-बार उखड़ना या उस पर पपड़ी जमना अक्सर आम त्वचा की बीमारी जैसा लगता है। लेकिन इलाज के बाद भी ऐसी दिक्कत बनी रहे, तो उसकी वजह जानने के लिए मेडिकल जांच कराना जरूरी है। ठाणे की एक 51 साल की महिला के मामले में यही बात सामने आई। करीब तीन महीने से स्तनाग्र के आसपास की त्वचा उखड़ रही थी, इसलिए उन्होंने विशेषज्ञ की सलाह ली। आगे की जांचों में स्तन कैंसर का शुरुआती स्टेज में पता चला।
इस महिला को स्तनाग्र के आसपास त्वचा उखड़ने और पपड़ी जमने की तकलीफ थी। एक्जिमा जैसे लक्षणों के लिए उन्होंने कई तरह के लोकल इलाज करवाए, फिर भी हालत में खास सुधार नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने ठाणे के किम्स हॉस्पिटल में जांच करवाई। वहां ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी विभाग की प्रमुख डॉ. वाणी परमार ने उनकी जांच की।
जांच के दौरान ध्यान में आया कि यह तकलीफ सिर्फ त्वचा तक सीमित नहीं हो सकती। इसके बाद की गई मैमोग्राफी में स्तन के बीच के हिस्से से बगल की तरफ फैले कैल्शियम के बारीक जमाव यानी माइक्रोकैल्सिफिकेशन्स मिले। इन नतीजों के बाद बायोप्सी की गई। उससे पता चला कि महिला को स्तन की पेजेट्स बीमारी (Paget's disease of the breast) और डक्टल कार्सिनोमा इन सिटू (DCIS) है।
पेजेट्स बीमारी स्तन कैंसर का एक दुर्लभ प्रकार है। इसका असर स्तनाग्र और उसके आसपास की त्वचा पर पड़ सकता है। त्वचा उखड़ना, लालिमा, खुजली, जलन और पपड़ी जमना जैसे लक्षण दिख सकते हैं। ये लक्षण एक्जिमा जैसी आम त्वचा की बीमारियों से मिलते-जुलते हैं, इसलिए बीमारी पकड़ में आने में देर होने की आशंका रहती है।
फाइनल पैथोलॉजी रिपोर्ट के मुताबिक कैंसर डक्टल कार्सिनोमा इन सिटू (DCIS) यानी गैर-आक्रामक रूप में ही सीमित था। कैंसर के आसपास के ऊतकों में फैलने का कोई सबूत नहीं मिला। मरीज की स्तन बचाने वाली सर्जरी की गई। प्रभावित हिस्से में स्तनाग्र भी शामिल था, इसलिए उसे निकालकर दोबारा बनाया गया। आगे की जांचों में सामने आया कि कैंसर हार्मोन-संवेदनशील है। उसी हिसाब से इलाज में रेडियोथेरेपी और हार्मोनल ट्रीटमेंट रखा गया। डॉक्टरों के मुताबिक कीमोथेरेपी की जरूरत नहीं पड़ी।
डॉ. वाणी परमार का कहना है कि सही इलाज के बावजूद अगर स्तनाग्र या उसके आसपास की त्वचा में बदलाव बना रहे, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। त्वचा का हर बदलाव कैंसर का संकेत नहीं होता, मगर लक्षण टिके रहें तो विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है। स्तनाग्र पर लगातार खुजली, त्वचा उखड़ना, पपड़ी, लालिमा, जख्म या असामान्य स्राव दिखे तो मेडिकल जांच करा लेनी चाहिए। स्तन में नई गांठ महसूस होना या आकार में बदलाव जैसे लक्षणों को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए।
इस मामले से एक अहम सीख मिलती है। इलाज के बाद भी स्तनाग्र की त्वचा की दिक्कत कम न हो, तो उसे सिर्फ त्वचा की बीमारी मानकर इलाज चलाते रहने के बजाय डॉक्टर से आगे की जांच करवानी चाहिए। जल्दी पता चल जाए तो सही इलाज की योजना बनाई जा सकती है।
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