ताड़ोबा के जलकुंडों में लगेंगे सेंसर, पानी घटते ही अपने आप चलेंगे पंप
ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प में कृत्रिम जलकुंडों के लिए पहली बार प्रायोगिक तौर पर सेंसर आधारित स्वचालित प्रणाली शुरू की जा रही है।
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चंद्रपुर के ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प में पानी बचाने और जानवरों को पानी मिलता रहे, यह पक्का करने के लिए एक नई पहल हो रही है। वन्यजीवों के लिए बनाए गए कृत्रिम जलकुंडों में पहली बार प्रायोगिक तौर पर सेंसर आधारित स्वचालित प्रणाली शुरू की जा रही है। इस तकनीक से जलकुंडों में पानी का स्तर काबू में रहेगा और भीषण गर्मी में भी वन्यजीवों के लिए पानी बना रहेगा।
ताड़ोबा में करीब 130 प्राकृतिक जलस्रोत और 350 कृत्रिम जलकुंड हैं। इनमें से कई कृत्रिम जलकुंडों तक सौर ऊर्जा से चलने वाले पंपों के जरिए पानी पहुंचाया जाता है। मौजूदा व्यवस्था में पंप लगातार चलते रहते हैं, इसलिए कई बार जलकुंड से पानी बाहर बहने लगता है। पंप बंद करने के लिए वनकर्मियों को मौके पर जाना पड़ता है, और जंगल में यह काम करते हुए वन्यजीवों से सामना होने का खतरा भी रहता है।
इसी दिक्कत को दूर करने के लिए प्रस्तावित प्रणाली में जलस्तर सेंसर, कंट्रोलर और रिले का इस्तेमाल होगा। जलकुंड में पानी तय सीमा से नीचे आते ही पंप अपने आप चालू हो जाएगा और जब पर्याप्त पानी भर जाएगा तो खुद बंद हो जाएगा। इससे बेवजह पंप चलने और पानी के ओवरफ्लो होने पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
वनकर्मियों को बार-बार जलकुंडों तक जाकर पंप चालू या बंद नहीं करना पड़ेगा। इससे समय बचेगा और जंगल में गैर-जरूरी आवाजाही भी कम हो सकती है। यानी इस पहल का मकसद सिर्फ पानी की बर्बादी रोकना नहीं, वनकर्मियों की सुरक्षा भी है।
डॉ. प्रभुनाथ शुक्ला, क्षेत्र संचालक, ताड़ोबा-अंधारी व्याघ्र प्रकल्प, चंद्रपुर ने बताया कि इस प्रणाली से जल संरक्षण को मजबूती मिलेगी और सूखे की स्थिति में भी वन्यजीवों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही ताड़ोबा के कोर क्षेत्र को अलग-अलग ग्रिड में बांटकर हर क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए जलस्रोत उपलब्ध कराने की योजना पर भी काम चल रहा है। इस काम को इसी वर्ष पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। जंगल में जलस्रोतों का बेहतर प्रबंधन वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से अहम माना जा रहा है, खासकर गर्मी में, जब प्राकृतिक जलस्रोतों में पानी कम होने लगता है।
ताड़ोबा प्रबंधन के मुताबिक पिछली गर्मी में भीषण गर्मी के बावजूद जलकुंडों में पानी भरने के लिए टैंकरों की जरूरत नहीं पड़ी थी। अब सेंसर आधारित स्वचालित प्रणाली शुरू होने से जलस्रोतों की निगरानी और पानी के इस्तेमाल को ज्यादा असरदार बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। ताड़ोबा की यह पहल तकनीक और वन्यजीव संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकती है।
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