सोम‌वार, 26 अक्टूबर 2026

अभी सब्सक्राइब करें
प्राइम अलर्ट
सारे लाइव अपडेट
AQI 270 | Poor 20:18 IST

विश्व ओकापी दिवस: काँगो के जंगल का 'फॉरेस्ट जिराफ' क्यों है इतना रहस्यमय जानवर

हर साल 18 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व ओकापी दिवस पर काँगो के घने वर्षावन में रहने वाले इस दुर्लभ जानवर की कहानी।

विश्व ओकापी दिवस: काँगो के जंगल का 'फॉरेस्ट जिराफ' क्यों है इतना रहस्यमय जानवर तस्वीरें सत्यापित नहीं हैं

धरती पर कुदरत ने कई अजीब, खूबसूरत और रहस्यमय जानवर बनाए हैं। इन्हीं में से एक है 'ओकापी' (Okapi)। पहली नज़र में इसे देखकर कोई भी पहचान नहीं पाता कि यह कौन सा जानवर है। इसके शरीर के पिछले हिस्से और पैरों पर ज़ेब्रा जैसी काली-सफ़ेद धारियाँ होती हैं, लेकिन मुंह और बाकी शरीर की बनावट घोड़े या जिराफ जैसी दिखती है।

इसी अनोखे और दुर्लभ जानवर को बचाने के लिए हर साल 18 अक्टूबर को दुनिया भर में 'विश्व ओकापी दिवस' (World Okapi Day) मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य मकसद है कि लोग कुदरत के इस अद्भुत जीव को जानें और उसके वजूद पर मंडरा रहे खतरों को दूर किया जाए।

ओकापी मध्य अफ्रीका के 'डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ काँगो' (DRC) में इटुरी के बेहद घने वर्षावनों (Rainforests) में रहता है। दुनिया में और कहीं भी यह जानवर कुदरती तौर पर नहीं मिलता। बीसवीं सदी की शुरुआत तक दुनिया को इसके बारे में कुछ पता ही नहीं था। वहाँ के स्थानीय आदिवासी इसे 'फॉरेस्ट जिराफ' यानी जंगल का जिराफ कहते थे।

जब 1901 में पश्चिमी वैज्ञानिकों को इस जानवर की जानकारी मिली, तो उन्होंने सोचा कि यह ज़ेब्रा की ही कोई किस्म होगी। लेकिन गहरी वैज्ञानिक रिसर्च के बाद साबित हुआ कि ओकापी ज़ेब्रा नहीं है। यह जिराफ के कुल (Giraffidae) का एकमात्र ज़िंदा जानवर है।

इसकी शारीरिक खासियतें भी हैरान करने वाली हैं। पैरों और पीठ की ज़ेब्रा जैसी धारियाँ घने जंगल में धूप की छाँव और पेड़ों के पीछे छिपने में इसकी मदद करती हैं। इससे शिकारी जानवरों से इसका कुदरती बचाव होता है।

ओकापी की जीभ गहरे नीले या जामुनी रंग की होती है और करीब 14 से 18 इंच लंबी होती है। इतनी लंबी कि वह अपनी जीभ से अपने कान और आँखें तक साफ़ कर लेता है। इसी लंबी जीभ से वह ऊँचे पेड़ों की कोमल पत्तियाँ, अनार और फल आसानी से तोड़कर खा लेता है।

विश्व ओकापी दिवस मनाने का मकसद सिर्फ इस जानवर की खूबसूरती की तारीफ़ करना नहीं है। असल बात उस गंभीर संकट को दुनिया के सामने रखना है, जो इसके सामने खड़ा है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संस्था आईयूसीएन (IUCN) ने ओकापी को 'संकटग्रस्त' (Endangered) प्रजातियों की सूची में रखा है।

पिछले कुछ दशकों में अवैध जंगल कटाई, खनन, हथियारबंद संघर्ष और इंसानी कब्ज़ों की वजह से काँगो का जंगल तेज़ी से खत्म हो रहा है। इसके अलावा ओकापी की खाल और मांस के लिए होने वाला अवैध शिकार उसके वजूद के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।

धरती के पर्यावरण और जैव विविधता का संतुलन बनाए रखने के लिए हर छोटे-बड़े जानवर का बचा रहना ज़रूरी है। ओकापी जैसे दुर्लभ जानवर का खत्म होना काँगो के अनोखे वर्षावन की एक अहम कड़ी का टूट जाना है।

इसीलिए विश्व ओकापी दिवस पर दुनिया भर की वन्यजीव संस्थाएँ, स्कूल, कॉलेज और पर्यावरण प्रेमी जागरूकता कार्यक्रम करते हैं। ओकापी संरक्षण परियोजना (Okapi Conservation Project) के ज़रिए काँगो के स्थानीय समुदायों को साथ लेकर इस जानवर और उसके रहने की जगह को बचाने की कोशिशें चल रही हैं। इस खास दिन पर हमें भी कुदरत की इस अनमोल दौलत को सहेजने का संकल्प लेना चाहिए।

क्या हम इस विज़िट को गिन लें? PT24 गूगल एनालिटिक्स से देखता है कि कौन सी खबरें किस पर पढ़ी जाती हैं। आपके हां कहने तक यह बंद है, आप सोच रहे हैं तब तक कुछ नहीं गिना जाता, और आप You पर कभी भी अपना मन बदल सकते हैं। हम क्या लेंगे