सेलू पंचायत समिति ने श्रमदान से बनाए चार रिचार्ज पिट, 16 लाख लीटर पानी जमीन में उतरेगा
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सेलू पंचायत समिति परिसर में जलतारा परियोजना के तहत चार रिचार्ज पिट बने हैं। एक बारिश के मौसम में करीब 16 लाख लीटर पानी जमीन में उतारने का अनुमान है।
जमीन के नीचे का पानी दिन-ब-दिन नीचे जा रहा है और पानी की किल्लत बढ़ती जा रही है। इसी से निपटने के लिए सेलू पंचायत समिति ने एक ऐसा कदम उठाया है जो पर्यावरण के लिए भी अच्छा है और दूसरों के लिए मिसाल भी।
प्रभारी मंत्री मेघना साकोरे-बोडर्डीकर की महत्वाकांक्षी जलतारा परियोजना के तहत पंचायत समिति परिसर में श्रमदान से चार रिचार्ज पिट (जलतारा परियोजना) बनाए गए हैं। हर पिट 170 घन फुट आकार का है। बताया गया है कि इन चारों पिट की बदौलत एक ही बारिश के मौसम में करीब 16 लाख लीटर बारिश का पानी जमीन में रिसेगा और भूजल का पुनर्भरण होगा।
इस उपक्रम का मकसद साफ है। बारिश की एक-एक बूंद को बेकार बहने से रोकना, उसे जमीन में उतारना, भूजल स्तर को ऊपर लाना और आगे आने वाली पानी की किल्लत से निपटना।
इसके पीछे एक स्थानीय परेशानी भी थी। केंद्रीय प्राथमिक स्कूल का परिसर काफी फैला हुआ है, इसलिए बारिश में यहां बड़े पैमाने पर पानी जमा हो जाता था और कई महीनों तक कीचड़ बना रहता था। इस समस्या को हल करने के लिए पंचायत समिति के खंड विकास अधिकारी उदय जाधव ने पहल की। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों को साथ लिया और परिसर की सूरत बदल दी।
खास बात यह है कि इस काम में किसी मशीन या ठेकेदार की मदद नहीं ली गई। खंड विकास अधिकारी उदय जाधव समेत सभी अधिकारी और कर्मचारी खुद आगे आए और श्रमदान किया।
अमल में विस्तार अधिकारी प्रभाकर शिंदे, संदीप पवार, अमोल माटकर, कृषि विस्तार अधिकारी जयश्री भोसले और कनिष्ठ सहायक जीवन खरावने शामिल रहे। इनके साथ नितीन लोखंडे, नारायण गाडेकर, प्रतीक चव्हाण, दत्तात्रय म्हस्के, प्रवीण चंदन, दत्ता काळे, नारायण काळे, दत्तात्रय पडघन, आर. डी. काळे, विक्रम खिल्लारे, देंगे और सचिन नगर वगैरह ने भी हिस्सा लिया।
सेलू पंचायत समिति ने पूरे जिले के सामने यह मिसाल रखी है कि अगर सरकारी दफ्तरों के परिसर में इस तरह के उपाय किए जाएं, तो जल संवर्धन को और बड़े स्तर पर ले जाया जा सकता है। इस उपक्रम की हर स्तर पर तारीफ हो रही है।
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